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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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पृष्ठ 341

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( बम्बई ५९ )
बाकये हाले खुद गुफ्तने मैना पेश सिरजन पैगाम बेदानिदे लोरक
( मैनाका सिरजनसे हाल कहना और लोरक के पास सन्देश भेजना )
काहे कँह बिधि हौ औतारी । गरु औतरतईं मरतिउँ भारी ॥१
चाँद मया कर दइ अहिबात् । मैंहि पारी सर ऊपर छातू ॥२
यह दुख मार सहै को वारी । तिहि निसि रोइ देवस महँ जारी ॥३
सोरहकरौं सरग परगाससि । बारह मदिर सेज तूँ बाससि ॥४
सहसकरौ सुरुज उनियारा । साईं मोर तिहि मयठ पियारा ॥५
पायें परतौं जो गवनसु, औ सिरजन पूछा सारठँ ।६
चारफरौँ जो परगासै, तासौं कैसें पारठँ ॥७
टिप्पणी-(१) औतारी—अवतार दिया; जन्म दिया । भरतिउ—मार डालते ।
वारी—कन्या ।
(२) अहिबात्—पति के जीवित होनेका सौभाग्य ।
(३) गवनसु—जाओ ।
४१४
( बम्बई ५२ )
ब शिकायत गुफ्तने मैना हाले खुद पेश सिरजन पैगाम बेदानिदे चाँदा
( चाँद के पास सन्देश भेजनेके लिये मैनाका सिरजनसे अपना
हाल कहना )
मोर मढार सरग कै राषसि । औ निसि मंहि सर ऊपर भाषसि ॥१
बाँमन देठ लोग मंहि दीन्हा । सो तैं लोर सैल कै लीन्हा ॥२
तूँ बिनु साथ कानि तिहिं नाहीं । नँइ मोर गोपसि परछाँहीं ॥३
मुहि राखसि अपनें उजियारी । लोर रूसि पर पर अँधियारी ॥४
पावन पुहुप भा तोर बिबाहा । लोरक मोर गहसि दुहुँ काहाँ ॥५
सिरमन बिनबतौं चाँद कहूँ, पठहि लोर दिबाइ ।६
छोड़ि देहि पर आवइ, मैंहि दिय आस तुलाइ ॥७