चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंरूप राह' हो । पर उसकी कोई संगति नहीं बैठती । बियर—निकट ।
हँकार—पुकारर ।
(२) हँसि—हंसित होकर, प्रसन्न होकर । कशान—चोहा ।
(३) तुरपा—घोड़ा । ताजिब—(वा ताज़ियाना)—चाबुक कोड़ा ।
( ) पर दियेँ—यह अशुद्ध पाठ जान पड़ता है । शुद्ध पाठ होगा "पर
दियेँ" जैसा कि बम्बई प्रतिमें है ।
(६) अध्यैँ—अङ्गीकार किया ।
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( रीडँड्र्स २८१ )
मताये जाना व कनीज़गान व गुलामान व जामहा बौरकराव
राब भोरक रा
( लोरकके पास राघका गृहस्थीका सामान दासी नौकर और
वस्त्र यादि भेजना )
जना सहस रथि राउ दौराये । चींभर झापर पाग पहिराये ॥१
डला बीस फुरि मरि लीन्हें । ते लै चेरन्हि माथै दीन्हें ॥२
चेरन्हि काँबर काँधैँ लिया । हरदि लोन तेल सभ दिया ॥३
चेरी दस फेर अमरन दीन्हें । अठर संजोग जो काठ न दीन्हें ॥४
औनों भाँत जुजहबा अहे । खाट पालकी पार्संग सहे ॥५
मरु अमरन रानी दीन्हें, चाँद पहिरन जोग ।६
लोर चाँद कहूँ मया जस कीन्हें, कौतुक मयठ सो लोग ॥७
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( रीडंग्स २९१ बम्बई ७ )
: बस्त्व पर्यने लोरक बर पाउन रा
( पाउन नगरमें लोरकका वास )
टाँका सौ एक' लाख लीन्हा । पीर पालि नाऊँ कहूँ दीन्हाँ ॥१
औरहिं दीन्हि जिहूँ जस बानों । सभ लोगहिं कहूँ देवसि थानों ॥२
धीर बस्तर आगें लै आये । जे आये सो सम्पुद पठाये ॥३