चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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१—बिहानी । २—कहानी । ३—रा० । ४—बीर । ५—राइ ।
६—मागीर । ७—राइ । ८—हँऊरामे । ९—सँबोगे । १० —
मिलवउँ । ११—हमारैं ।
टिप्पणी—(४) सोगीर—सम्भवतः शुद्ध पाठ मागीर है जैसा कि बम्बई प्रतिमें है ।
यह उड़ीसाका एक प्रसिद्ध स्थान है । राइ करिंका—सम्भवतः करिका,
कलिङ्गका रूप है और यहाँ तात्पर्य कलिङ्गनरेशसे है । इन भौगोलिक
पहचानोंकी प्रामाणिकता काव्यमें आये अन्य भौगोलिक पहचानों पर ही
निर्भर है ।
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( रौलेण्ड्स २८ : बम्बई २ )
अस्वान दहानीदने राव मर लोरक रा व बर्गे सम्ब दादन
( रावको लोरकको घोड़ा और पान देना )
सेंइप राइ पान कर लीन्हों । निभर$^१$ हँकार लोर कहँ दीन्हों ॥१
सीस चढ़ाइ$^२$ लोरक$^३$ लेतसि । रहसि फैंकान राइ फुनि देतसि ॥२
सिंहि तुरिया चढ़ि लोर पहिरावा । इनै$^४$ ताजिन घोर दौराया$^५$ ॥३
रहैंसा लोर तुरी सो पावा । बचन सगुन सो इहवाँ आवा ॥४
पुरुख सोइ जो पर हिथें$^६$ जाइ । जग सुने तिन्हि करत भलाई ॥५
लोर चाँद गोबर बिसार$^१०$, अगयै$^११$ हरदी धास । ६
बरस दिवस औ कतिक मासा$^१२$ कीन्हा भोग बिलास ॥७
पाठान्तर—बम्बई प्रति—
शीर्षक—मरहमत कर्दने राव अस्तम व बर्गे दादन लोरक रा (राव
सेतकका लोरकके प्रति कृपा भाव व्यक्त करना और पान देना) ।
इस प्रति में पंक्ति ३ और ४ के पद इस प्रति में परस्पर मिले हुए हैं ।
अर्थात् पदों क्रम है ३।२ और ४।१; ३।१ और ४।२ । यही क्रम ठीक
भी जान पड़ता है ।
१—बीर । २—जाइ कें । ३—लोरक । ४—एक । ५—हने । ६—
बीरवा । ७—हीं । ८—दिठै । ९—गिद्द । १०—विसारा । ११—
ऐहल । १२—केतिक ।
टिप्पणी—(१) सेंइप राइ—हरदीपाटनके रावका नाम जान पड़ता है । पर कड़वक
१०५ में उनका नाम ऐम्प प्रकट होता है । हो सकता है पाठ में