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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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पृष्ठ 323

२१
पृष्ठ १४७-ब (कडवक १७४) के शीर्षकसे जान पडता है कि उस
प्रतिके तैयार करने वालेने इसे 'टूँगा' पढा था (उसने इससे हाथ पाँव
कटे होने का अभिप्राय ग्रहण किया है) । सम्भवतः इसका तात्पर्य
किसी सम्प्रदाय विशेषके योगीसे है । टूँडा या ढूँवा नामक किसी
योगी सम्प्रदाय की जानकारी हमें नहीं है। हो सकता है यह
अपपाठ हो ।
१७२
( मनेर १०१-ब )
नैं लोरक, तुरा रोजे बद उफ्पद मारा याद कुन
( लोरक यदि तुम पर विपत्ति आये तो मुझे स्मरण करना )
लोरक को तिह पीरा परही । चाँद तोर जो टूँटा हरई ॥१
दइ सँवरि मुहिं नैबरसि लोरा । ठाठें ठाठें मैं आउब सोरा ॥२
पसना कहि सिध चला उठाई । चाँद् लोर (दोइ) रहे सुमाई ॥३
परि इक सिधमैं पइठ नबाई । पुनि उठ चलि कै बाट घटाई ॥४
दवस चारि जो चलतहि भये । नगर एक पैसारथ किये ॥५
लोरक कहा चाँद् तुम्ह बइसहु, हौं सो नयर महँ आउँ ।६
कनक अन औ लागती, बर बेचन कछु र कराउँ ॥७
मूलपाठ—(१) बोर ।
टिप्पणी—(१) परहा—(इतना) बह ।
(५) पैसारथ—प्रवेश ।
(६) बइसहु—बैठो । नयर—नगर ।
(७) कनक—गेहूँ । अन—अन्न ।
१७३
( मनेर २ प.अ )
दरमियाने कुश्तानए त्रिभुभान चाँदा रा मौद
( चाँदाको मन्दिरमें बैठाया )
चाँद मढ़ी बैठार छुपारई । लोर नगर महँ सीदँ आई ॥१
दूतं छभित देखि तों पावा । छंदलाइ चाँदा पहँ आवा ॥२