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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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पाठान्तर—मनेर प्रति—
शीर्षक—दास्तान सिफ़ते मौलाना दाउद व गुफ़्तारे ऊ (मौलाना दाऊद
और उनकी रचनाकी प्रशंसा)
१—दाउद कवि जो चौंशा गाईं । २—र । ३—बोल । ४—आखर ।
५—छाँप उसी हीं सोइ बखानी । ६—काय । ७—सुनाथैँ । ८—मुक्लिक
नयन सुनु बोल हमारी । ९—बनइ । १ —एक एक बोलि मौति अस
फिरवा, कहउँ भो हीरा तोर ।
३६१
( मनेर १७१ ब )
विदभा कर्दने लोरक हकीम रा
( लोरकका चिकित्सकको बिदा करना )
गारुर समुँद चाँद लै चला । तैं हँ बात कहसि अति भला ॥१
बायें दिसि तूँ लोर न जाबसु । दाहिनें बाट बहुत फर पावसु ॥२
पिरम भुलान यह बोल न मानी । भाट चलत सहाइ न आनी ॥३
डांडी के लोरक चाँद चलाई । दाहिनें दिसिवैं दिस्टि मिलाई ॥४
घर आपुन दण्ड छाड़हि कहीं । जहाँ परिरोहि ठाड़े तहाँ ॥५
बार अँधवतैं जाइ सुलाना, लोरक सारगपूर ।६
दिनकर मूँड ऊघावा, राता जैस सिंदूर ॥७
टिप्पणी—(२) फर—फल ।
(४) डाँडी—एक प्रकार की पालकी ।
(५) परिरोहि—मना करें । ठाड़े—खड़ा ।
(६) बार—दिन । अँधवतैं—अन्त होत ही । सुलाना—जा पहुँचा ।
३६२-३७०
( अनुपलब्ध )
अनुमान है कि पञ्जाब प्रतिम प्राप्त निम्नलिखित चार कड़वक इस स्थान के
होंगे। किन्तु उनका क्रम और उचित स्थान निश्चित करना सम्भव नहीं है ।