चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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( रीबैण्ड्स २०१ : मनेर १७ ब )
मन्तर खान्दीदने गुनी व होशियार शुदने चाँदा
( गुनीका मन्त्रोपचार करना और चाँदाका जीवित होना )
कउन लोग तुम्ह गरुड़ि पूछी । ठाँठ कहु' आँ जातहि' पूछी ॥१
धात गोवार गोषर मोर४ ठाऊँ । घनि चाँदा मँहि लोरक नाऊँ ॥२
गुनी कहा जिन जीउ हुलावसु । धीर बँधहु' अब चाँदहि' पावसु ॥३
बोलि मन्त्र छिरकसि लइ पानी । उतरा बिस चाँद अँगरानी८ ॥४
धाइ लोर घर माँइ उठाई । पिरम पियार सौंपि गियँ लाई ॥५
सरग हुत चाँद उतरि जनु आइ, देख खर बिहसान' ।६
कँवल भाँति मुख बिगसा, दुख जो होत कुँभलान ॥७
पाठान्तर—मनेर प्रति—
शीर्षक—पुरशीदने हकीम बात व नामे लोरक व चाँदा (चिकित्सकका
लोरक और चाँदाका नाम और जाति पूछना)
१—नाँउ कहु । २—जातो । ३—मुर । ४—है । ५—बाँधहु । ६—
चाँदा । ७—पानी । ८—म —चाँदा अँगगरानी । ९—सरगहि चाँद
उतरि जनु, देखित लोर विहसान । १ कुँझलान ।
टिप्पणी—(२) गोवार—ग्वाल ।
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( रीबैण्ड्स २०२ )
होशियार शुदने चाँदा व दादने लोरक गुनी रा जेवर
( चाँदाका उठ बैठना और लोरकका गुनीको आभूषण देना )
हिया सिरान जरत जो अहा । छूटि चाँद निसि गहनँ गहा ॥१
लोरक होत सो आस पियासा । जियइ चाँद मन पूजी आसा ॥२
अभरन अनि फै सम लोरा । तरुवन हाँस आँ सोने खूरा ॥३
इतपुर मोर भाँ कान कै पूरी । मूद भंग और फर्रै क चूरी ॥४
हाथ क करणा सोभन नाँधी । अँगूठी मानिक के फाँठी ॥५