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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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( मनेर १६७भ )
दास्तान आमदने गारुड़ी न गुफ्तने मन्तर बर चांदा
( गारुड़ीका जाकर चाँदपर मन्त्र फूँकना )
रूपन लागि मन्त्र उँह कही । सुनतहि लोग अचम्भै रही ॥१
भरि एक रात चाँद हुत डसी । डसतहि मुई न बिसफर बसी ॥२
अगनित गुनी सबै चलि आवा । होई अकारन मरन न पावा ॥३
बिपतैं जीउ न काहुँ माई । डसतहि मुयई परट पर आई ॥४
अब सो गुनी मन्त्र एक बोली । सुन पावा इसराफस टोली ॥५
देख गुनी मन चिन्ता, अखेतैं मन्त्र एक बार ।६
गुरु कै बचन सँभारउँ, जीउ देइ करतार ॥७
३३७
( मनेर १६७ब )
दास्तान जिन्दाशुदने चाँदाका बेफरमाने मुरादारा
( ईश्वरेच्छासे चाँदाका जीवित होना )
पिरम मन्त्र जो गारुड़ पढ़ा । बँफर लहर सुन चाँदहि चढ़ा ॥१
कर कगन अमरन सभ दीन्हा । औ सो गारुड़ माँगि कै लीन्हा ॥२
हरदी समत चले फिर आयी । कीन्हि सिघासन चाँद भलाई ॥३
दुँहु के मन कै पूवी आसा । करहिं बहुत मन भोग बिलासा ॥४
अलखनिरंजन आदि बियातइ । दई क लिखा सो मानुस पावइ ॥५
भरम दरम सभ सोही, चाँदा ओ बीउँ संसार ।६
तुम्ह मुई तुम्हहुत जिउ देवेतैं, मरत न लागत बार ॥७
टिप्पणी—(१) गारुड (स गारुडिक)—विषवैद्य सरपका मन्त्र जाननेवाला ।
(३) बिलासा—देखिये टिप्पणी १५२।६ ।
(५) अलख निरंजन—(नाथ पंथियोंकी भाषामे) ईश्वर । आदि—निश्चय ।
दई—ईश्वर, भाग्य ।