चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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(६) दरब (द्रव्य)—धन ।
(७) बार—विलम्ब, देर ।
३३८-३४३
(अनुपलब्ध । सम्भवतः निम्नलिखित कड़वक इस बीचके हैं।)
[ १ ]
( बम्बई ३१ )
जंग कर्द गोरक बा अमीरपान व पूज्यानान व बाजीउफ़तन्द व बाज़ीगुरीख्तन
( गोरकका अहीरों और महलियोंसे लड़ना कुछ मारे गये कुछ भाग गये )
सभ महलियों गिरे घरू आनी । नियरे मीचु दसी दइ आनी ॥१
धँस बीर कोप्या सब जीउ आन । ओही धनुष परो गिउ आन ॥२
जो सँभारे सो तस मारा । को रोवइ कइ करइ पुकारा ॥३
एक महँ होइ उठे सोमहाई । बहु मारे बहु गये पराइ ॥४
आतहिं मरहिं ब्यान नहिं पारैं । आगें मास पाछें निहारैं ॥५
धीबो रहम पहेलिया, तिहकौं मीचु घटान ।६
कउवा चील्ह सा(भाग) मा, जम्बुक गीध अधान ॥७
मूल पाठ—भुग (बे हे गाफ) ।
[ २ ]
( बम्बई ३२ )
बाजे जंग शुजायस्त रवान शुदने चाँदा व गारक तरफ हरदी
( चाँद और गोरकका युद्ध क्षेत्रसे हरदीकी ओर रवाना होना )
रकत कँहूँनी उबे गँधाई । चला छोर छोड़िहूँ सो ठाँई ॥१
पुनि बीर ओडन कर लीन्हा । पुरुख दिसा तब पाँवत कीन्हा ॥२
करि कै खेती साझर घाती । चौरासी सत्त निंदरा मूती ॥३
रुण्ड मुण्ड मँह मेदिन पारा । बहु रोवैं बहु करहिं पुकारा ॥४
बैंतरत नदी बो भइ पनबारा । डाकिन आगिन उतरहिं पारा ॥५