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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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(सुमेर १६६अ)
शब्दान कर्दन लोरक अज खोये चाँदा
(चाँदके बिरहमें लोरक)
सात देवस लगि सरग ढफारा। सोक मँझर भान बिसियारा ॥१
राहु केतु यह देखत आहा। सुरज सनेह पाउँ न अहा ॥२
सुक्र बिरस्पति दोउ बुलाये। चाँद क छितवत गरह दुहुँ आये।३
यहु महि छंकर मारि अटामहु। चाँद मोर पिय आजु बियावहु ॥४
गगहा भिगा कीन्हा पै घरी। भै सँग आगो होइ गिरी ॥५
सुरज क रोवत घरैँ, और नखत को आइ ।६
नदिक झार सरग सब जरै, अउर धरति को आइ ॥७
१३५
(सुमेर १६६ब)
एज्मो इस्तहोबारी कर्दने लोरक
(लोरुकका विलाप)
रैन माँग परकाहू सूर। जैँ र सुनौ सो धाहहिं आवा ॥१
तन्त्र न मन्त्र न औखद मूरा। और सहेलिहूँ पन्हन तोरा ॥२
लोरक पीर बहु फारन करइ। धाहि कपारै कुन्त दै मरइ ॥३
बिहिसंगित जेउँ सम घर भारू। तिहि बिन कस अब जीउँ अधारू॥४
चन्दन काटि कै चितइ रची। आन आग तिह ऊपर सची ॥५
तैं बैसन्दर बारी, कसै धरि सरियाइ ।६
इपी गुनी एक आनाँ, चाँदा लीन्हि जियाइ ॥७
टिप्पणी—(१) जैँ—जिसने। धाहहिं—रोता हुआ।
(२) पन्हन—कंचन।
(५) बैसन्दर (स वैश्वानर> प्रा बइस्साणर, बरत्ताणर>बैताँदर)—
अग्नि। बारी—ज्वाला। सरियाइ—सजाकर।
(७) शुनी (गुणी)—गारुड़ी सर्पवैद्य। लीन्हि—लिया।

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