चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
पृष्ठ 280, कुल 520 में से
संदर्भ में पढ़ें२४०
हौं ठँइकै उहँ चिंतँ मोरें । काइ कुँवरू होई रोयें तोरे ॥३
इँह बिधि देखि देसन्तर लीन्हों । काह कहौं'अनउत्तर दीन्हों" ॥४
तुम तज हम जाइहँ परदेसू" । मैं देखुकीन्हि" पुरुख कर भेसू ॥५
हौं सो महर धिय चाँदा", चहूँ भुवन उजियार ।६
कौन अजोग संघ कियउ", कुँवरू भाइ तुम्हार ॥७
पाठान्तर—बम्बई और मनेर प्रतियाँ—
शीर्षक—(बं) जबान दादने चाँद बज कुँवर [य]। (चाँदका कुँवरूको
उत्तर) (म) गुफ्तने चाँद कुँवरू रा जवाब (चाँदका कुँवरूको जवाब)।
दोनों ही प्रतियों में पंक्ति ४ और ५ क्रमशः ५ और ४ है।
१—(ब म) सुनु कँवरू। २—(ब) कह; (म) कहि। ३—
(ब) धिय। ४—(ब, म) छाडतँ। ५—(ब) वोइ दस गवे यह
लोग पठाऊ (म) वोइ दस होन्के बाट पठाऊ। ६—(ब) हीं
ठैंहकैं तह चित्त कसाह (म) ही ठइकैं तह बिय बसि। ७—(ब)
रोये (म) हो कुँवरू रोये। ८—(ब) इह बिध देस देअन्तर लेऊँ;
(म) लेऊँ। ९—(ब) करौं। १०—(ब म) कछ ऊत्तर देउँ।
११—(ब) हम नज (?) जाब परदेसू (म) तुम तज जायब परदेसू।
१२—(ब) कीन्ह। १३—(ब) हौं महरे के धिय सो चाँदा (म)
हौं महरे के धिय चोंदा। १४—(ब) कौन अजोग संग मिक : (म)
तोर साग चित्त बाँध भयउँ।
टिप्पणी—(१) मोर—मेरा। राता—अनुरक्त।
(३) ठँइकै—ठहाका दी। उँह—वह।
(५) जाइहँ—जाऊंगी हूँ।
(७) अजोग—अयोग्य। सघ—सग साथ।
२९७
(रीर्यण्ड्स २३३ । मनेर १४१ख)
जबान दादने कँवरू या पदानत चांदा रा
(कुँवरूका चाँदाकी भर्त्सना करना)
अस चाँदा तुम लाज गँवाई । मरग हथौ सुइँ उतरी' आइ ॥१
(मुख कारी मसि) फिरसि कुँपागीं। पाग पास हाई अँधियारी ॥२
रहु न चाँदे मनहि म्जाइ । अग का न हाइगवन कें जाई ॥३