चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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टिप्पणी—(१) झगा—लम्बा ढीला कुरता अँगबरगा ।
(५) उहूँमाँ—वहाँ उस जगह ।
२९५
( रीडेन्ड्स २३ : मनेर १४८ब )
शिनाख्तने कूँवरू लोरक रा दरमियाने राह अज पस्ते च चाँदा
( मार्गमें कुँवरूका लोरक और चाँदाको पहचानना )
कुँवरू आवध¹ चीन्हौं लोरू । धावा संखि चलायहु गोरू² ॥१
पाछें हेरत³ चाँदा भाई । जिउ कुँवरू कर गयउ उड़ाई ॥२
कइसि लोर सों भला न किया । कित ले चलों महर कै धिया ॥३
तिरियहि सरम नाँग भुखि होई । तिन्ह कँ⁴ सप न लागइ कोई ॥४
धूड़ी खोलिन तुम्हरी माई । तिहँकै मया न तुम्हे चित आई ॥५
बारि बियाही मैना माँझरि , लोरक आइ तुम्हार ॥६
पारि बूड़ ररि मरियेंहि, माइ बचन हमार ॥७
पाठान्तर—मनेर प्रति—
शीर्षक—शिनाख्तने कुँवरू लोरक रा (कुँवरूका लोरकको पहचानना)
१—अगुवत । २—रहा सखि परा सब गोरु । ३—हेरन्त । ४—
गुन्द । ५—रूख चढ़े । ६—तेउरे । ७—तिहके मयाँ न चित मूँह
आई । ८—बारि बिदाही मैना ।
९—म—करहि जिन्त तुम्हार ।
टिप्पणी—(१) आवध—आता हुआ । चीन्हौं—पहचाना । संखि—उद्यत होकर !
गोरू—ढोर, गाय भैंस आदि ।
(२) पाछे—पीछे । हेरत—देखते ही ।
(४) तिरियहि—स्त्रियों की । सरम—शर्म । नाँग—अरथ, बोदा ।
(७) ररि—रट रट कर ।
२९६
( रीडेन्ड्स २३१ बम्बई २६ मनेर १४९क )
गुफ्तने बादा कुँवरू रा हिकायते इश्क
( चाँदका कुँवरूसे अपने प्रेमकी बात कहना )
चाँद कहा कुँवरू सुनु बाता । लोर मोर धिउ एकै¹ राता ॥१
जियतेँ जीठ² न छाड़ेउँ³ काछू । दिन अस मये सो सोग पठाऊँ ॥२