चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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( मनेर १४०अ )
दास्तान आमदने चाँदा अज सर कस ब रस्तन
(चाँदका महलसे निकलकर रवाना होना)
लै लोरक पर पाँवर दिखाबा । देखि चाँद कुछ चितहिं न लावा ॥१
चलहु लोर पुनि हो भिनसारा । लागि गुहार सब लोग हमारा ॥२
यस सुन पावइ बावन पीरू । बिरह दगध पुनि मोर सरीरू ॥३
ओहि देखत कोई बाइ न पारइ । पोलत बोल माँछ (सँइ) मारइ ॥४
अरजुन सँस धनुष कर गइइ । ओहिर्क हाक न मनुसं सहरी ॥५
कहहि लोर सुनहु तुम्ह चाँदा, अहिसै महिं न हराउ ।६
राठ रूपचंद बाँठा मारेउँ, अब बावन पर जाउ ॥७
मूलपाठ-मह ।
टिप्पणी-(२) भिनसारा-प्रात काल सुबह ।
(३) गुहार-पुकार ।
(५) ओहिर्क-उसका ।
(६) अहिसै-इस प्रकार ।
२९३
( मनेर १४०ब : १४१अ )
दास्तान शमशीरे व गिरे लोरक गिरफ्तने मैना
(मैनाका लोरककी तलवार और डाक के लेना)
ओडन छोड़ मैना लै छूटी । सँह निसि बागि बिरह कै यूठी ॥१
दुन्दु मरुखम्महि रोइ संचारा । करहिं मइत धनु उठइ झनकारा ॥२
मैना माँजरि रूप मरारी । इहँ गुन कितहु न देखेउँ नारी ॥३
ओडन छोड़ फन्दु अस धरा । नैन नीर परु काजर सरा ॥४
कठ ऊँच न बोलसि बोलू । औगुन करब राख मोर तोलू ॥५
अति सरूप सयानी, औ कुलबन्ती नारि संजोग ।६
तुम्ह चाँदा मन राता, महिं परा बिजोग ॥७