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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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पृष्ठ 276

२४१
आधी रात जो आइँ, तब उठ चालहु बीर ।६
घर उपत तुम्ह उतरहु, पौरि गाँग फर तीर' ॥७
पाठान्तर—मनेर प्रति—
शीर्षक—मुकाम कर्दने लोरक सरे नजूमी व कैफियते बग (लोरकका
जोतिषीके पास रुकना और ज्योतिषीका संकटकी बात कहना)
१—चाँदा । २—माँग । ३—लोक सबै तुम्ह मानहु । ४—फन्द
फड़ावइ । ५—पुरुष फन्द भल सिधि पावइ । ६—एक दोइ काक जैत
मैं बेलउँ । ७—औगुन । ८—देखउँ । ९—जब आवहि । १—बूड़ि
गाँगके तीर ।
टिप्पणी—(६) पाड़—संकट ।
(७) पौरि—तैर कर ।
२९१
( टीकेण्ड्स २१४ : मनेर १४६ अ )
फुस्म आवर्दने लोरक चाँदा रा व बाखुद बुर्दन
( लोरकका चाँदाको नीचे लाकर अपने साथ ले जाना)
रात परी' तो लोरक आवा । मेलि धरह कै आपु जनावा ॥१
बाट जुहत फुनि' चाँदा होती । लेतसि अभरन मानिक मोती ॥२
अँगुरी लाइ लोर तस ताँनसि' । आवत घर चाँद न जानसि' ॥३
प्रथम मेलि अरघ सब देतसि । औ पाछे चाँदा धनि लेतसि' ॥४
चाँद सुरुज कै पाँयन' परीं । सुरुज चाँद लै माथे धरी ॥५
निसि अँधियार मेघ' धन परसे, चाँद सर" लुकाइ । ६
बेगि बेगि कै चाले दोउ, जानउँ जाइ उड़ाइ' ॥७
पाठान्तर—मनेर प्रति—
शीर्षक—दास्तान आमदने लोरक दर जायगे चाँदा बर लोरक (लोरक
का चाँदके घर आर (चाँदका) लोरकक पास आना)
इस प्रतिमें पंक्ति ३ और ४ क्रमशः ४ और ३ हैं ।
१—भयी । २—बाट गहत तो । ३—तानों । ४—आवत बाद पुरुख
नै जाना । ५—पाछे पुरुख चाँदा घर लेठसि । ६—के पाँवदि । ७—
सुरुज । ८—माँच । —नीर । ९ —सुरुज । ११—बेगि बेगि चलु
चाँद कुमारी गँहि गहा दूर उड़ाइ ।