चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
पृष्ठ 271, कुल 520 में से
संदर्भ में पढ़ें२१८
२७७
( रौड्स २२१ ) -
पुरसीदने महरि बर गुलफ़रोश राज व बाज नमूदने गुलफ़रोश हवाले चाँद
( महरिका मालिनसे पूछना और मालिनका चाँदकी शिकायत करना )
महरि कहा सुन मालिन माइ । अइस तैं सुना तइस कहु आई ॥१
फाल्हि सो चाँद देउ घर गई । देउ दुआर बितारन मई ॥२
चार सुघन जग जातहिं जापा । कुछ आपन औ बहुत परापा ॥३
चाँद न आछी अपनैं बानी । बिन पानी अति सीम सुखानी ॥४
घर घर भात दस मदिराई । फारिकदयी मुँह निकर न जाई ॥५
सों राजा के धिय सो, चाँदा कैसें लोक हँसावसि ॥६
औ जो पुरखा सात गये सरग, तैं तिहँ लुआवसि ॥७
टिप्पणी—(२) फाल्हि—कल । बितारन—वितण्डा ।
(३) जातहिं—यात्राके निमित्त । आपन—अपने स्वरूप ।
(५) फारिक—फारिग़ फ़ारिग्मा ।
२७८
( रौड्स २२२ )
शर्मिन्दा शुदने महरि पूरा अज इंतामे चाँदा
( चाँदकी बदनामी पर फूल महरिका लज्जित होना )
सुनतहि फूला महरि लजानी । पर सहब जनु मेला पानी ॥१
जम तुमार पुरउँ दह दही । सम होइ महरि भात सुन रही ॥२
काँन भाँत पर गयइ भुलाई । इहँ कुरपारन लागि गँवाई ॥३
काहे करैं विष तँ भातारी । बहु आँगरस मरतेउँ पारी ॥४
अस आरदन दुनि कहुँ भइँ । जहाँ पियाही तिहि कय फइँ ॥५
दाइ कुरपारन, अगरण लाग हँसाजनहार ।६
भातैं लाग कह मालिन, डगरी आइ छिनार ॥७