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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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२३७
२७५
( रॉकिण्डम २१९ )
तल्बीहने मैना मालिन रा व पय्यामान दर महर
( मैनाका मालिनको बुलाकर महरके घर भेजना )
मैनहिं मालिन तोहि बुलाइ । ओरहन देइ महराँ पठाई ॥१
चाँद सुरुज राइ कँ धिया । अइस न कीझ जस तैं किया ॥२
पूनिउँ सूर दखत उजियारा । आप कलंकी भा अँधियारा ॥३
महरि महर कँ भयी महि कानीं । लबतेउँ आग उतरतेउँ पानी ॥४
अमरूँ धिय दीन्हि मुकराइ । [ ] कर अन्त न जाइ ॥५
चार मुखन जग देखत, मोमेउँ पाँगर लागि ।६
जिह अगरग अस लागै, जाइ तम तज भागि ॥७
टिप्पणी—(१) ओरहन—उलाहना शिकायत ।
२७६
( रॉफेण्डम १२ )
रफ्तन गुलफरोश दर खानए राय महर व दीद ए...
( राय महरके घर मालिनका जाना )
माल्नि पुहुप करंड भर लइ । राजमंदिर खल भीतर गइ ॥१
महरहिं सीस नाइ भइ ठाढ़ी । कुसुम करी ल दसन फाढ़ी ॥२
हारपूर फूला पहराइ । आग पूज भर मन पिजाइ ॥३
फुनि माल्नि का औचारी । यह निशि दिनरइ दाम तुम्हारी ॥४
आज सूरव मंदिर पगपयउ । चाँद पद आगहन दइ पगपयउ ॥५
जस आगहन प कदा, तम हा कदी न पागे ॥६
मन बात हां दासी, फिरें नग बदन मेंमारी ॥७