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सर्वकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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२१५
यह गियान तुम्ह चाँद न बूझउँ । मैनाँ सइँ को झूरहि झूझठँ ॥४
ओछ बात सुन चाँद न फीजइँ । उत्तर देइ[जनि*]९उत्तर लीजै ॥५
सिराजदीन सुनउ फष-छन्द, दाउद कही सँवार ।६
मरे सौध के१० दोउ नारी, लाइ घरी अँकवार ॥७
पाठान्तर—बम्बई प्रति—
शीर्षक—रिहा करने अमीर मसूद व रूप व सामान दादन मैना व मना
करदन चाँदा (अमीर मसूदको रिहा करना और मैनाको शृंगारका
सामान देना और चाँदाको बरजना) । इस शीर्षकका विषयसे कोई
सम्बन्ध नहीं है ।
१—मीर मसूद क । २—खंडवानी । ३—अरैँ । ४—कपूरैँ । ५—
सूझी । ६—मैना स्योको युझ न जूझी । ७—कीजा । ८—कन ।
९—न कीजा । १०—मीर मसूद क ।
टिप्पणी—(१) सोध—ईंग्या ।
(३) चिरौरै—(क —राखिर कटक>राउर बटक>राउर इरर>चिरौरा)
—फब्या । बण्डछाप—छापा हुआ रेशमी वस्त्र ।
२७२
( शीर्षकहस्त २१६ )
बाज़ गुजश्तने चाँदा बुतखाना सूये रानये खुद
( चाँदका मन्दिरसे घर लौटना )
चाँद सिघासन मंदिर चलाबा । देख मनाथीं लाँछन पाषा ॥१
जो बैठ मारिंहु लाँछन लागा । आनतँ चँदर मेघ सर मागा ॥२
सोरहकरो करत उनियारा । पूनेतैं रात भइ अँधियारा ॥३
चाँद फलंकी चितहि सुखानी । एक खंड नाही नौ खंड बानी ॥४
ईंट पर जाइ मंदिर उतरी । कँवर देखि तो पाछँ परी ॥५
चढ़ी चाँद घोंराइर, सिर धर पैठ तराइ ।६
एका निकरे बाद्यै, मुख मसि धोई न जाइ ॥७
टिप्पणी—(१) सिघासन—देखिये टिप्पणी १५२।३ ।