चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२१४
परायें देखि, सके न कोउ छुड़ाइ ॥६
सँबर आत बिसरिगा, बरैमा सीस डुलाइ ॥७
२७०
( रीडॅन्ड्स २१४ : पंजाब [प] )
आमदने लोरक नजदीके कुस्तराना व मालूम कर्दने रस्क कैफियत उम्ग
( लोरकका मन्दिरके निकट आकर लोगोंसे युद्धकी जानकारी
प्राप्त करना )
कँवर तरायी खरज आवा । देस लोग मिल आगें धावा¹ ॥१
बिन पैठे सो² बेगि पुलावहि । करम हमार इहैं फल जावहि ॥२
चाँदा मैनाँ के अस कही³ । अबलहि अस न काहू⁴ सो मई॥३
सुनहिन बोल काँ करहिं मनावौ⁵ । तम न कोउ सो आइ छुड़ावौ⁶ ॥४
जो रे दुहुँ मँह एक मर जाई । हत्या लागी देस बुराई ॥५
कँवर तरायी खरख, दुहूँ पैसि छुड़ावहु ।६
लाग जान¹⁰ कै हत्या, उजरत देस बसावहु ॥७
पाठान्तर—पंजाब प्रति—
शीर्षक नष्ट हो गया है ।
१—धावा । २—दूत । ३—चाँदहि मैनाहि होइ के कही । ४—काहूँ ।
५—सुनहि न बोल न केहुँ मनावा । ६—तम न कोउ ओ यत
छुडावा । ७—बल दूँह गेंद ऐको मर जाइ । ८—हत्या लागी देस
बुझाइ । ९—दुहुँ मँह पैस छुडा[बहु] । १०—जाइ ।
२७१
( रीडॅन्ड्स २१५ : बम्बई १५ )
आश्ती कर्दने लोरक मियाने चाँदा व मैना
( लोरकका चाँद-मैनामें सुलह कराना )
परे साँध के दोऊ नारी । भीतर मोरी सोबन बारी ॥१
दै संडवान दोउ पियाईं । कोहबर जरतैं छिड़क बुझाईं ॥२
बास बिरौरी पान खियाईं । एक खंडछाप आन पहिराईं ॥३