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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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२४७
( रीकेण्ड्स १९५ )
गुफ्तने लोरक जमालियत व खूबिये मैना
( लोरक का मैनाकी प्रशंसा करना )
मैना तिइ जस विरी न भाहे । तोहि छाड़ि चित एक न चाहे ॥१
मैं तोरैं रस बिरस बिमारा । देख न भावैइ आपु सहारा ॥२
मैं तों नारि चाँद अस पाई । चाँद जोत सब गमी हेराई ॥३
सो सुन अपजस कें लाई । लागु न मैना कहैं बुराई ॥४
नैन देखि हँ पाठ उभारी । हाँकी सुनि कै अखरत पारी ॥५
तू चाइ को आगर मैना, मोरैं चित न समाइ ।६
अमरित कुण्ड बिंद परसै, सो हरनित नहि खाइ ॥७
२४८
( रीकेण्ड्स १९३क )
गुफ्तन मैना मर लोरक रा
( मैनाका लोरकसे कथन )
तोर घाँद मोर उकेरेहु काहा । जो करिये सो आछस जाहा ॥१
सोरह कराँ चोरी दिखरावइ । चाँदा मोसों सरमरि पावइ ॥२
लोरक तोरैं नारँग बारी । भूलि न पैसु परई बारी ॥३
बास केतकी भँबर चोरावइ । सो हर काटैं बीड गँवावइ ॥४
हौँ मिय तारैं लोर डराऊँ । नींद न जानउँ सुगति न खाऊँ ॥५
छोर मत्त मन संका, पर बेलैं कित जाइ ।६
घर न दास रस पूरे, पर घर आठ पराइ ॥७