चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
पृष्ठ 250, कुल 520 में से
संदर्भ में पढ़ें२१९
२४५
(रीसेन्ट्स १९३)
ब आमदने मादर लोरक व आश्ती कदन मियाने लोरक व मैना
( लोरककी माँका आकर लोरक-मैनामें सुलह कराना )
सुन खरभर खोलिन तस धाइ । जस मगिरथ यह छगिन आयी ॥१
लोरइ अजफर पकसि न आवा । अबहूँ इहँ भव फही फहावा ॥२
केस गही गर माथ ओनायसि । कुचछाल दुहुँ गालहि आयसि ॥३
वास्त्र चेरि पियावहिं पानी । साकर घिय चेरी फहूँ आनी ॥४
आँ विह ऊपर बरस अँङ्गारा । दहि दहि कोयला भइ सो नारा ॥५
आग लाइ घर अपने, लोर दहाँ दिसि धावहु ।६
बेग धँस जर मैनाँ, अमरित छिड़क बुझावहु ॥७
२४६
( रीसेन्ट्स १९४ )
आश्ती कदन लोरक बा मैना बज गुफ्तार मादर
( माँके कहने पर लोरक-मैनाका सुलह करना )
लोरक हरकि खोलिन घर आइ । धीर नारि फेंट लाइ मनाइ ॥१
सुआ छलि धनि सेज सँमारे । पान फीरें मुख दीनि सँधार ॥२
रँग बिनु पान खियायसि मोही । मा रँग इहँ न देखउँ तोही ॥३
रंग बिनु पातहिं भाउ बनाया । तुम लोरक रंग अनतँ आवा ॥४
घर हर आगि मैना जरौं । चित मन घाउड पाँड़ौँ जरौं ॥५
मज न भाउ रुचि न कामिनि, आ न हाइ मन हाथ ।६
सो मैं नैन न ढरूँ, तिल न रहूँ संग साथ ॥७