चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअनारी । ५—गारीं । ६—चोरीं । ७—लाख होएउँ दस साँवर ।
८—कारीं । ९—भवन् रात जबियार ॥
२४१
( रीट्संस १८९ )
दबाब दादन मैना बर चोलिन रा
( चोलिनको मैनाका उत्तर )
काह कहउँ हौं खोलिन माइ । हौँ मुइ आहौं दही परायी ॥१
घिय कें जात आइ मह फेरीं । हौं फुनि भइ तिहूँ कें चेरी ॥२
जान बूझ कें महँ कस गोवहु । होइ तुम्हार उसफर रोवहु ॥३
जाकइ कोइ जरै सो जाने । बिनु जरतें कस काइ बखाने ॥४
तुम्ह जानहु मोसेटों कर चोरी । लोरक भीर रँगइ किह गोरी ॥५
हौँ जो कहत तुम्ह दिन दिन, लोर रैन फित जाइ ।६
भर न दाख रस पूरे, घर घर आठ पराइ ॥७
२४२
( रीट्सड्स १९ )
दर गातिर गुजश्तनोरने लोरक कि मैना मुनीदने बस्त
( लोरकका समझ जाना कि मैनाको बात ज्ञात हो गयी )
फह गियान मन लोरक गुनौं । अयसि मैनों कुछ हँ सुनौं ॥१
तार पिरोध महँ सुतैं फीन्हा । तार अन्तर पर अन्तर बीन्हा ॥२
बरके लार पास धनि पँठा । रक्त झरत मुख रोवत दीठा ॥३
आँसु पोंछि पानी धोंवा । माहिं देउि तुम्ह कहइ रोवा ॥४
नित रहै न पारी मैनों । दरम न करे पफ्त महिं धैनों ॥५
के मन सोक सकायहु, के कुछ भयउ पियाउ ।६
रम मँह बिरम सँवारे, पिवहि पड़ा कम भाउ ॥७