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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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(रीडिंग्स १८८क)
जवाब दादन लोकिन मर मैना रा
(मैनाका लोरिकका उत्तर)
रोस न आइ होइ हरुवाइ । हिरदै घात आइ गरुवाइ ॥१
हिरदै घोल भार सह लीजा । हिरदै कहुँ खीउ गरू न कीजा ॥२
हिरद होइ पुछ केर उठानां । हिरद नसैनी फङ्गा सयानां ॥३
हिरद मों भूँख न जाइ अदाभी । पाउ न खोल जिंह चित गरुआभी ॥४
गरुवइ होइ घर अपनें रहठ । अस हिरवैं कहूँ चिन्त न करहु ॥५
आनेठँ बात गुन आगर, मैना न कीजइ फोइ ।६
गारु फार दोइ जीभ उपारो, तू लोरक कर आइ ॥७
२४०
(रीडिंग्स १८८ख : काछी)
तक़रीर कदने लोरिन मर मैना रा
(लोरिकका मैनासे कथन)
बारि बियाहि जो तैं हुत आनी । बीर बाँधि क दीन्ह उसानी¹ ॥१
गुन खोर² धन नाव चढ़ाई । तिहँ न कन्त कौ कोउ पतियाई³ ॥२
यह मेरौँ कम होइ हियारी । लेसु फाटि कै गुनँ अनारी ॥३
लागइ आग सेब दिन मोरी । छोड़ सुरुज रँगइ निसि चोरी⁴ ॥४
जोइ सुरुज चाँद पहँ आवा । सरग तराइन भइँ दिखरावा ॥५
लाज मयौँ तिहिँ साँवर, बइस रात अँधियार ।६
नीरस चाँद मुख फारी, रात भरें उजिआर ॥७
पाठान्तर—काछी प्रति ।
शीर्षक—जवाब दादन मैना लोरिन रा (मैनाका लोरिकको जवाब)
१—बारि बिवाहि मूँ को रानी । बीर बाँज औ नाव कहाती ॥ २—गुन जो खोर । ३—तिह पग तह को पूँछिया । ४—[--] काट कहत गुनें