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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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१४

पुरुख न आपु सराहे, पूंछति कहइ मात ।६
चोर पोल सो मारै, जो मन बाउर रात ॥७

टिप्पणी—(१) बिगहसि—पहचानती हो । गहन—ग्रहण । उघारइँ—उद्धार
रिया ।
(२) सान्ध—साथ । न्हेडैइँ—भगाया ।
(३) सगरै—सभी ।
(४) गार—गिरा ।
(७) बाउर—पागल । रात—अनुरक्त होकर ।

२१५

( रीलैण्ड्स १० अ )
सखन करने चाँदा दर मेहानते लोरक
( चाँदाका लोरकका उपहास करना )

आपुहि बीर सराहसि काहा । आत गुवार आइ घरबाहा ॥१
इमरैं सेर सहस एक भाईहिँ । काज कहा नही तिह एक न छेबहिँ ॥२
अति फकान जो पूँछ बढ़ाबा । असबारहि कहँ फेरि न आवा ॥३
जाकहँ छोर कीन्हि मिताई । सिंह के मंदिर कस पैठेउ धाइ ॥४
ऐसें नर जो सेउ करावइ । साईं दोइ अस छोइ न आवइ ॥५
सुन सो पावइ महर अस, गोवरा परिहँइँ बेरि ।६
एक घरति सो मरि पहँ, तूँ डोलहु किह फेरि ॥७

टिप्पणी—(१) गुवार—ग्वाल । आइ—हो ।
(७) परिहँइँ—देँगी । बेरि—बेड़ी ।

२१६

( रीलैण्ड्स १ ब )
जवाब दादने लोरक बर चाँदा रा
( लोरकका उत्तर )

साईं दोइ अस बोलैं नारी । रात आइ अहनाहूँ मारी ॥१
कै पायन बिरुवार सँचारै । कै दिनाय पूनों महँ सारै ॥२