सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

DevanagariAwadhipublished520 पृष्ठ

पृष्ठ 233, कुल 520 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 233

१२
२११
( रीकैण्ड्स १५७ )
गुफ़्तनै चाँदा लोरक रा खुन्द
( चाँदा उत्तर )
लोर रैन जो घोरी आवइ । अमरन लेत तिन्हि कवन छुड़ावइ॥१
लोरहु नेह फइइ दुनि फाहा । अइस उतर कहु आइत आहा ॥२
मैं तिन्हको का संदेस पठावा । कौन सकति ऐं मो पहँ आवा ॥३
जा तिन्हिं पखि उठी जो आई । रहे न पाठ सो मरे उड़ाई ॥४
डिठ दइ पाहु आइ सो बेरा । नीन्द न फोठ लोर महिं हेरा ॥५
मींजु तार तूँ आनसि, फँसै मेट न जाइ ।६
पाठ धरहु तिहँ बिस्तर, लायहु जीठ गँवाइ ॥७
टिप्पणी—(१) मो—मुझ ।
२१२
( रीकैण्डस १५८क )
सवाल करदने लोरक ब नमूदन तमसील
( लोरकका कथन )
जाँलहि जीठ घट महँ होई । तौलहि सरग न आवइ कोई ॥१
प्रथम मानुम जीउ गँवावइ । तो पाछैं थइ सरगहिं आवइ ॥२
मर कै चाँद सरग हौं आवा । जो डिठ होइ डराइ डरावा ॥३
हौं तो मरतें बिनहु सो देखी । तोहि देख धन मुएऊँ बिसोखी ॥४
सुर्ये जो मारे सो कस आहा । चाँद सुर्ये कर मारग काहा ॥५
देख रूप डिठ दीन्हों, तो आयउँ तिहिं पास ।६
रहे नैन तिहिं देखेवैं, रहे जीइ सें साँस ॥७
टिप्पणी—(१) जाँलहि—जब तक । तौलहि—तब तक ।
(२) पाछैं—पीछे, बादमें ।
(५) मारग—मारना ।