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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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२४
पुरुख न आपु सराहै, पूछति कहइ बात ॥६
घोर घोल सो मारै, जो मन पाउर रात ॥७
टिप्पणी—(१) च्छिन्हि—पहचानती हो । गह्म—ग्रहण । उबारेंउ—उबार
दिया।
(२) साझ—साथ । प्हरेउँ—भगाया ।
(३) भगरीं—सभों ।
(४) गार—गिरा ।
(७) पाउर—पागल । रात—अनुरक्त होकर ।
२१५
(रीडिंग्स १७ ब)
रुपाऊ कर्दने चाँदा बर मेहानते लोरक
(चाँदाका लोरकका उपहास करना)
आपुहि बीर सराहसि काहा । जात गुवार आइ घरमाहा ॥१
हमरें घेर सहस एक जाहींहें । काज कहा नहीं तिइ एक न छेपहें॥२
जति कप्तान जो पूँछ पहारा । असवारहि कउँ फेरि न आवा ॥३
माझें लोर कीन्हि मिठार्ड । सिंह के मंदिर कस पैठेउ धाई ॥४
ऐसें नर आ सेउ कराइइ । साईं दोह अस छोड़ न आवइ ॥५
सुन जो पावइ महर जस, गोचरा परिहँइ बेरि ।६
एक धरति सो परि पर्ह, हँ डोलहु फिरि केरि ॥७
टिप्पणी—(१) गुवार—ग्वाल । जाइ—हो ।
(७) परिहँइ—पड़ेगी । बेरि—बेड़ी ।
२१६
(रीडिंग्स १७ ब)
जवाब दादने लोरक बर चाँदा रा
(लोरकका उत्तर)
साईं दोइ अस बोलै नारी । रात आइ अइनातें भारी ॥१
कै आपन बिरुबार सँभारै । कै बिनाय धर्मा मई मारै ॥२