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सर्वकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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२१
ऊँच पोल तो चेरी जागहिं । चोर देखि भय जीयें लागहिं ॥४
छाड़ न केम घरसि दइ फेरा । करहि गुहार चोर महिं हेरा ॥५
मन रहँसै धनि अस कहै, जिये आस तुलान ।६
दयी ठाँठ जो माँगेउँ, सो महँ सरबस आन ॥७
पाठान्तर—पंजाब प्रति—
शीर्षक—अंश अप्राप्य है ।
१—सूख । २—गुहरवा । ३—पूरी पंक्ति अप्राप्य है । ४—चोर देखि
बहु जियसे डरारहिं । ५—पंक्ति ६-७ वाला अंश कट गया है ।
टिप्पणी—(१) बेर—समय । गढ़ी—पकड़ा । बारी—बाला युवती ।
(२) नियरेँ—निकट । गुहरावा—पुकार लगाऊं ।
(५) हेरा—देखा ।
(६) तुलान—पूरी हुई ।
(७) गुहार—पुकार ।
(८) सरबस—सर्वस्व सब कुछ ।
२१०
( रोकेण्ड्स १६१ )
जवाब दादने लोरक मर चाँदा रा बानरमी
( लोरुकका चाँदासे धीरे कहना )
मन अचरत छनि भीमर छोली । अपने जनम न कीन्हेउँ चोरी ॥१
आयउँ तोरैं नेह कुंवारी । कही चोर आँ दीन्ही गारी ॥२
चोर होवेउँ तोर अमरन लेवेउँ । पूर गहन ऊँ ऊघदि देवेउँ ॥३
घरी केम तूँ महिँ गुहरावसि । सोवत लोग फेरि अरय जगापसि॥४
अमरन काज न आयइँ मोरे । रूप भुलानेउँ चाँदा तोरें ॥५
तोहि लागि जो मरेउँ, नेह न छाडेउँ काउ ।६
पिरत तुम्हार लाग मोर हिरदें, जै दिठ बिनु आइ तो खाउ ॥७
टिप्पणी—गुहरावसि—पुकारती हो ।