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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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( रीड्सबर्ग्स १४१; पंजाब [प ] )
सिस्ते नखशती चौरन्सी
( चौरण्डीकी चित्रसरीका वर्णन )
झार चौरुन्डी इगुर पानी । चित्र उरेह फीन्द सुनपानी ॥१
लंक उरेह भमीखन रेहा । सैंध मान दसगर र्क देहा ॥२
सीता हरन राम मंग्राऊँ । दुर पांडो कुरुखेत क ठाँऊँ ॥३
करपाँ पार कोइया सुभारू । अजपी नगरी अगिया बँतारू ॥४
साँझी पञ्चकाश्च भइ लावा । चक्रव्यूह अगिँ उथापा ॥५
सीह-सैंसूर मिरघ मिरपावन आनीं भाँत ।६
कपा-काथ परलोक निसारैंभ, लिख लीँयी जिहँ पाँत ॥७
पाठान्तर—पंजाब प्रति—
शीर्षक—फट गया है ।
१—पूरी पंक्ति अस्पष्ट है पढा नहीं जाता ।
२—राउलदा (?) ।
३—पंक्ति ६-७ अस्पष्ट हैं पढ़े नहीं जाते ।
टिप्पणी—(१) झार—पोतकर, रगड़कर । इंगुर—(सं हिङ्गुल>इङ्गुल>ईंगुर>
इंगुर) एक प्रकारका लाल रंग जिसे अभ्रक पारद तथा गन्धक घोट
कर बनाते हैं। स्त्रियाँ इसे अपना माँग भरनेके लिए सिन्दूरकी तरह
काममें लाती हैं । बानी—(सं वर्णिक)-रंग । सुनबानी—सोनेका
रेखांकन । इगुरी पृष्ठ भूमि पर सोनेसे रेखांकित चित्र चौदहवीं-
पन्द्रहवीं शताब्दीमें काफी प्रचलित थे और उसके नमूने बड़ी मात्रामें
चित्रित जैन ग्रन्थोंमें देखनेको मिलते हैं ।
(२) लंक—रावणका निवासस्थान । भमीखन—विभीषण । रेहा—
रेखांकित किया । दसगर—दशकन्ध, रावण ।
(३) दुर—दुर्योधन । कुरुखेत—कुरुक्षेत्र, जहाँ महाभारत हुआ था ।
(४) इस पंक्तिम लोककथाओंमें प्रचलित पात्र जान पड़ते हैं किन्तु उनकी
पहचान हम नहीं कर सके हैं । अगिया बैताल (अगिया बैतार)—
विक्रमादित्यकी सिद्ध दो बैतालोंमेंसे एक ।
(५) चक्रव्यूह—चक्रव्यूह ।
(६) मिरखावन—मृगारण्य शिकारगाह । आनीं—अनेक प्रकारके ।