चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१४०
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( रोकीण्ड्स ८१ )
आमदन भाट बर लोरक अज फिरस्तादन महर
(महरके भेजे भाटका लोरकके पास आना)
भाट गुसाँई तुम्ह गइ धावसि । आगैं दइ लोरक लै आवसि ॥१
चढ़ तुरग भाट दौरावा । लोरक साझ जो आभर पावा ॥२
कहवाँ भाट घोड़ दौरायहू । काकर पठये कसा तुम्ह आयहु ॥३
लोर महर तुम्ह बेग हँकारी । कँधरू धँधरू चाँठे मारी ॥४
जारब गोवर लाग गोहारी । लइ अध चाँठ होइ अँधियारी ॥५
उठा लोर सुन माँग हमारी, महर भया अवसान ।६
आज चाँठ रन मारौं, देउउँ राइ परान ॥७
टिप्पणी—(५) जारब—जला दूँगा ।
(६) अवसान—हताश परेशान ।
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( रोकीण्ड्स ९० ; बम्बई १३ )
गुने राजा रफ्तने लोरक व मुस्तइद शुदन बर जंग
( लोरकका युद्धके लिए सुसज्जित होना )
घर गा लोरक ढाँकि सँभारी । ओडन खाँड लीन्ह तसवारी ॥१
बाँध रक्तावल खसि' सर पागा' । पहिरसि तारमार कर अँगा ॥२
घनमहरी कर खींच पछावा । पीत' काट मनाइ मढ़ावा ॥३
सावर जिह्वन लीन्ह टपाइ । लोरक मुँह दीन्हि औंधाइ ॥४
सारग एक जुगत कर घड़ा । जनु अर्जुन कहूँ रावन कड़ा ॥५
फिर मँजाइ कतार' लीन्ह, बाँध चला तरवारि ।६
रक्त पियास खाँड लोर कर, दाँग जीभ पसारि ॥७
पाठान्तर—बम्बई प्रति—
शीर्षक—आमदने लोरक दर खाना व साख्ताशुदन बराय जंग व दर तन
आमदा व बस्तने अस्लहा (घर आकर युद्धकी तैयारी करना और
सशास्त सुसज्जित होना)