चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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(रौन्दुम १५)
दर गुस्सा शुदन राव रूपचन्द बर रसूलान व खामोश मानदन इशा
( राव रूपचन्दका दूतोंपर क्रोध )
अमहिं डीठ विह मार पियारू । खिन एक भीतर गोवर जारूँ ॥१
मूँद फाट के गयँड फिराऊँ । गाल फाड़ कें रूँरा टँगाऊँ ॥२
चीन्ह सून माँसु लै जोँहूँ । पुदुरहिं सून रक्त सब गोँहूँ ॥३
तिह फा यूक्त फरत ढिठाइ । जस माँ कहउँ तइस कहु जाइ ॥४
नाह वेग घाँदा लै आवहु । मुख दुपार टूट लै पावहु ॥५
करवों तम जम चोलेउँ, नाँउँ पसिठ कर आहु ।६
पग फाँद लै आवहु, तूँ इहवाँ दूत नाहु ॥७
टिप्पणी—(२) गवैँडू—गाँव । काइ—निघारु कर ।
(३) चीन्ह—पी पहि । मूँदुर—गुस्ता ।
(५) मुख दुपार—मुख्य द्वार ।
(६) करवों—करूँगा ।
(७) इहवाँ—यहाँ ।
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( रौन्दुम ७४ )
रज हम पैदन शुमुरान कराय बाज गुफ्तन गुर भज गव
( दूतोंको जानेका आदेश )
गजा (बोलिक) दीन्हि रजायसु । सुनहुँ (शमिट कीन्हि) पदायसु॥१
जग मूँ राजा कीन बुराइ । घाँद सबद सुनि गोबर धाइ ॥२
गावर समूँद अन अरगाहा । पूड़हि गइ न पायइ थाहा ॥३
गजा (जा) मरग पड़ पावहु । माँ न पूर घाँदा कँ पारहु ॥४
गजा नगत जा मरग भू आई । घाँद निहारे मूखें निमि पाहूँ ॥५
गगन पह् जा दग, जान इदरों आद ।६
पाट न पैर गजा, यह मणियाहु शाद ॥७
मूलपाठ—१—...