सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

DevanagariAwadhipublished520 पृष्ठ

पृष्ठ 150, कुल 520 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 150

१२१
सहज रात बनु सुरंग पटोरी । और रंगरावी पान सुपारी ॥३
हार डोरिह विह रग राता । तिह रग वाजिर फही सो बाता ॥४
आन निरासा कस लै जीवा । खाँड आन सिह ऊपर पीवा ॥५
अस कै अचरें सुन कै, राजा भा मन मोर ।६
रकत घार तिह तँह, रस घर मारा जोर ॥७
८२
( रीकैन्स ३०७ )
सिकते दन्दान चाँदा गोयद
( दन्त वर्णन )
चौक भये पानहि रंग राता । अतरहिं लाग रहे जनु घाँता ॥१
अधर पहिर जो हँसे कुँवारी । बिजरी लाँक रैन अँधियारी ॥२
मुख भीतर दीसै उनियारा । हीरा दसन करहिं चमकारा ॥३
सोन खाप जानु गड़ घरे । जानु सूरुज कर कोठिला भरे ॥४
दारिउ दाँत देखि रस आसा । मैंबर पंख लागे जिहिं पासा ॥५
समझा राठ रूपचन्द, सुनिफे वचन सुहाठ ।६
भोजन जेवैंत राजहि, लाग दाँत कर घाउ ॥७
टिप्पणी—(१) चौक—(स चतुष्क) आगेके चार दाँत । घाँता—घाँत ।
(४) सोन—सोना सुवर्ण । खाप—हम्मी गुफ्ती । कोठिला—कोठार,
अनाज रखनेका बड़ा पात्र या घर ।
(५) दारिउ—दाड़िम अनार ।
८३
( रीकैन्स ३०८ )
सिफते जुबाने चाँदा गोयद
( रसना वर्णन )
चाँद जीभ मुख अमरित पानी । पान फूल रस पिरम कहानी ॥१
पदुमनि वचन नीदि सुनि आवइ । दुख बरै सुख रैन बिहावइ ॥२
अमरित कुण्ड भयउ मुख नारी । सहज पात रस पहँ पौनारी ॥३