सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

DevanagariAwadhipublished520 पृष्ठ

पृष्ठ 149, कुल 520 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 149

१२
८०
( रौवैन्द्स ४६ ब )
सिफते बीनीये चाँदा गोयद
( नासिका वर्णन )
मुँह मँह नाक अइस क सिंगारू । जनु अमरन ऊपर कें हारू ॥१
सुवा नाक ओ लोग सराहा । विहु जाइ अधिक से आहा ॥२
सहज ऊँच पिरिव में सब खानौँ । भाँ सच साकर फरहूँ पखानौँ ॥३
तिलुकफूल अस फूल सुहावा । पदुमिनि नाक माठ वस पावा ॥४
नाक सरूप अइस मैं कहा । बानु धरग सोन कर महा ॥५
बेनाँ परिमल फूल कस्तूरी, सर्ब बास रस लेइ ।६
खिन मुरखि राठ रूपचंद, अरध दरभ सब दइ ॥७
टिप्पणी—(१) अइस—इस प्रकार । क—का ।
(२) सुवा—शुक तोता ।
(४) तिलुक—एक प्रकारका पुष्प । फूल—नाककी फुल्ली नाकमें
पहननेका आभूषण । सम्भवतः साहित्यमें नाकके आभूषणका
यह प्राचीनतम उल्लेख है । मुसलमानी शासनके आरम्भसे
पूर्व नाकके किसी आभूषणकी चर्चा न तो किसी भारतीय
साहित्यमें है और न कलामें ही उसका अंकन पाया जाता है ।
पदुमिनी—पद्मिनी व्यतिरी रानी ।
(६) बेना—सूस करन । परिमल—कई सुगन्धियोंको मिलाकर बनाई
हुई बात विशेष ।
(७) अरथ—अर्थ । दरभ—द्रव्य धन ।
८१
( रौवैन्द्स ४६ ब )
सिफते लबहान चाँदा गोयद
( ओष्ठ वर्णन )
राधा ओ रत अधर निरासी । जनु मनुसैं कै रकत पिआसी ॥१
रुखौ दरेरैं दरेरैं सीखी । रकत पियइ मनुसैं गुन सीखी ॥२