चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२ २
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( रीकैण्ड्स ९ )
बाज नमूदने खुपारदार पैगामे-बावन व कबूल कर्द्ने महर व दहानीदने नेग
(ब्राह्मणके बावनका सन्देश कहनेके पश्चात् महरका उसे स्वीकार करना
नेग दिलाना )
बाँभन टीक बोल कै पहू । बरठ चाँद रहु मोर बढ़ाई ॥१
तूँ नरिन्द देस कइ राऊ । तोफइँ बरहि न आवइ फाऊ ॥२
रास गुनित फर नाँवँ न छीजा । राइ बीव घर बेटी दीजा ॥३
दयी लाग काज जो करा । ताकर धरम दुहूँ जग घरा ॥४
बाँभन बोल महर जो मानाँ । गोष क बनिज दिवाई पाना ॥५
सेंदुर फुछ चढ़ाये, भी मोविह गलबार ।६
देत चाँदा बावन कइँ, बीर लाउ फरतार ॥७
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( रीकैण्ड्स ११ )
बाज गप्तन खुपारदार व हम्माम व बाज गुफ्तन बैसियत निकाह वर जीव
(ब्राह्मण और नाईका आपस आउर जीवसे सगाईकी बात कहना )
तेल फुलेल दुवठ अन्हवाये । अपूरुव वस्त्र काढ़ि पहिराये ॥१
महर मंदिर जेइहिं सेवनारा । छीन्हि पान मये असबारा ॥२
दसी असीस फिरामी बागा । रहस भले बोल भल लागा ॥३
जानि सीव घर देस बघाइ । घरी चाँद बावन कइँ पाई ॥४
पह भयी निसि अँधियार बिहावा । करहु बियाह चाँद घर जावा ॥५
जीव सुठाम सांग कहुँप, जिन सुनइ एक सस आइ ।६
महर दत बावन कइँ चाँदा, पलहु पियाहिं आइ ॥७
टिप्पणी—अन्हवाये—स्नान कराया।