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बुल्ला साहिब का शब्दसार (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - जीवन-चरित्र एवं अमर पद)

बुल्ला साहिब का शब्दसार (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - जीवन-चरित्र एवं अमर पद)

Bulla Sahib Ka Shabdasara: Belvedere Press Allahabad

सन्त बुल्ला साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished36 पृष्ठ

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पृष्ठ 5

बुल्ला साहिब का शब्दसार
गुरु और नाम महिमा
॥ शब्द १ ॥
धन्न धन्न गुरुदेव जो यह गति लाइया ।
परम जोति निरंकार ताहि गुन गाइया ॥ १ ॥
मिलि जुरि सखी सहेलरि चउक पुराइया ।
अर्ध उर्ध अरु मद्द तो कलस धराइया ॥ २ ॥
तिरगुन गुन करि तेल काया तन जारिया ।
अष्ट जाम बरै जोति कबहुँ न बुझाइया ॥ ३ ॥
ऐसो अद्भुत रंग साध जन रंगिया ।
बुल्ला सोभा धाम ताहि अंग अंगिया१ ॥ ४ ॥
॥ शब्द २ ॥
सुखमनि सुरति डोरि बनाव ।
मेटि है सब कर्म जिय के, बहुरि इतहिं न आव ॥ १ ॥
पैठि अंदर देखु कंदर२, जहाँ जिय को बास ।
उलटि प्रान अपान मेटो, सेत सब्द निवास ॥ २ ॥
गंग जमुना मिलि सरस्वति, उमँगि सिखर बहाव ।
लवकंति३ बिजुली दामिनी, अनहद गरज सुनाव ॥ ३ ॥
जोति आया आपहीं, गुरु यारि सब्द सुनाव ।
तब दास बुल्ला भक्ति ठानो, सदा रामहिं गाव ॥ ४ ॥
॥ शब्द ३ ॥
सांई के नाम की बलि जावँ ।
सुमिरत नाम बहुत सुख पायो, अंत कतहूँ नहिं ठावँ ॥ १ ॥
नाम बिना मन स्वान मंजारी४, घर घर चित लै जावँ ॥ २ ॥
(१) पहिना । (२) गुफा । (३) चमकता है । (४) कुत्ता बिल्ली ।