बुल्ला साहिब का शब्दसार (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - जीवन-चरित्र एवं अमर पद)
Bulla Sahib Ka Shabdasara: Belvedere Press Allahabad
सन्त बुल्ला साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
पृष्ठ 4, कुल 36 में से
संदर्भ में पढ़ेंजीवन-चरित्र
—* : ० : *—
बुल्ला साहिब यारी साहिब के गुरुमुख चेले और जगजीवन साहिब व गुलाल
साहिब के गुरु थे। यह जाति के कुनबी थे और असल नाम इनका बुलाकीराम था।
इन्होंने भुरकुड़ा गाँव जिला गाजीपुर में अपना सतसंग कायम किया जहाँ इनके बाद
गुलाल साहिब और भीखा साहिब भी सतसंग कराते रहे और अब तक वहाँ तीनों
की समाधें मौजूद हैं। इनके जीवन का समय विक्रमी सम्बत् १७५० और १८२५ के
बीच जान पड़ता है।
जैसा कि गुलाल साहिब के जीवन-चरित्र में लिखा गया है बुल्ला साहिब पहले
गुलाल साहिब के नौकर थे और हल चलाने के काम पर तैनात थे। बुल्ला साहिब जब
किसी काम को जाते तो भजन ध्यान में लग जाने से अक्सर देर कर देते थे। इनकी
सुस्ती की शिकायत लोगों ने गुलाल साहिब से की और गुलाल साहिब कई बार इन
पर खफा हुए। एक दिन का जिक्र है कि बुल्ला साहिब हल चलाने को गये थे और वहाँ
भगवंत के ध्यान और मानसी साध सेवा म लग गये। उसी समय गुलाल साहिब मौके
पर पहुँच गये और बैलों को हल के साथ फिरते और बुल्ला साहिब को खेत की मेड़ पर
आँख बंद किये हुए बैठा देखकर समझे कि वह औंध रहे हैं और क्रोध में भरकर एक
लात मारी। बुल्ला साहिब एकबारगी चौंक उठे और उनके हाथ से दही छलक पड़ा।
यह कौतुक देखकर गुलाल साहिब हक्के-बक्के हो गये क्योंकि पहले उन्होंने बुल्ला साहिब
के हाय में दही नहीं देखा था। पर बुल्ला साहिब बड़ी आधीनता से गुलाल साहिब से
बोले कि मेरा अपराध छमा करो मैं साधुओं की सेवा में लग गया था और भोजन
परोस चुका था केवल दही बाकी था उसे परोस ही रहा था जो आपके हिला देने से
हाथ से गिर गया। यह गति अपने नौकर की देख कर गुलाल साहिब चरणों पर गिरे
और उनको अपना गुरु धारन किया।
बुल्ला साहिब सुरत शब्द अभ्यासी थे जिनकी ऊँची गति और भारी महिमा उनकी
बानी से प्रगट होती है।
नीचे दी हुई वंशावली से उनके गुरु घराने का हाल जान पड़ता है।
बावरी साहिब (दिल्ली)
।
बीरू साहिब
।
यारी साहिब
।
बुल्ला साहिब (भुरकुड़ा, जिला गाजीपुर)
।
गुलाल साहिब
।
भीखा साहिब