बुल्ला साहिब का शब्दसार (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - जीवन-चरित्र एवं अमर पद)
Bulla Sahib Ka Shabdasara: Belvedere Press Allahabad
सन्त बुल्ला साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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।। शब्द १२ ।।
ऐसे मन रहु हरि के पास । सदा होय तोहि मुक्ति बास । १॥
जस धना१ सेन१ कबीरदास१। नामदेव१ रैदास१ दास ॥२॥
सदना१ पोपा१ कान्हादास१। यारीदास१ तहँ केसोदास१ ॥३॥
जिन हरि भक्ति महँ लियो निवास । जम जालिम की काटि फाँस ॥४॥
जुग जुग अचल प्रगास बास । जन बुल्ला की पुजलि आस ॥५॥
।। शब्द १३ ।।
नाथ हाजिरी मेरी लीजे, ता तें दफ्तर दाखिल कीजे ॥ टेक ॥
हौं अतीत२ गरीब सिपाही, वाहि रोज कछु दीजे ॥ १ ॥
दया धरम अरु ज्ञान ध्यान व्रत, येही अल्फा३ दीजे ॥ २ ॥
पाँच पचीस तीन मोवासी, वाहि तोरि गढ़ लीजे ॥ ३ ॥
जो जन हृदय बिचार दिखतु है, जन बुल्ला सहि कीजे ॥ ४ ॥
।। शब्द १४ ।।
यह जग जैसे सुपन है, सुनहु बचन परमान ॥ टेक ॥
यह माया जस डाइनी, हरहि लेति है प्रान ॥ १ ॥
पल पल छिन छिन ब्यापई, है जम दूत समान ॥ २ ॥
इत की आसा छोड़िये, भजि लीजे निजु नाम ॥ ३ ॥
उबरे कोई संत जन, जिन्ह सुमिरयो है नाम ॥ ४ ॥
जन बुल्ला सरनहिं तेरी, बेरी४ काटो राम ॥ ५ ॥
भव सागर तें उबारिये, दीजे अपनो धाम ॥ ६ ॥
।। शब्द १५ ।।
जिवन हमार सुफल भो हो, सइयाँ सुतल समीप ॥ टेक ॥
एक पलक नहिं बिछुरे हो, सांई मोर जिहीत५ ।
पुलकि पुलकि रति मानल हो, जानल परतीत ॥ १ ॥
मन पवना सेजासन हो, तिरबेनी तीर ।
हम धन तहवाँ बिराजल हो, लिहले रघुबीर ॥ २ ॥
(१) भक्तों के नाम। (२) यतीम, अनाथ। (३) अलिफी, मेखली। (४) बेड़ी।
(५) जीव-हित।