बुल्ला साहिब का शब्दसार (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - जीवन-चरित्र एवं अमर पद)
Bulla Sahib Ka Shabdasara: Belvedere Press Allahabad
सन्त बुल्ला साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअरिल छंद २५
(२)
स्याम घटा घन घेरि चहूँ दिसि आइया।
अनहद बाजे घोर जो गगन सुनाइया॥
दामिनि दमकि जो चमकि त्रिबेनी न्हाइया।
बुल्ला हृदय बिचारि तहाँ मन लाइया॥
(३)
सुखमन सीतल सेज हेत ताही से कीजै।
गगन गुफा में पैठि दरस सतगुरु का लीजै॥
आवागवन न होय ब्रह्म कबहूँ नहिं छीजै।
बुल्ला हिरदय प्रेम भरि अम्मर पद लीजै॥
(४)
सामहिं उगवे सूर भोर ससि जागई।
गंग जमुन के संगम अनहद बाजई॥
अजपा जापहिं जाप सोहं डोरि लागई।
बुल्ला ता में पैठि जोति में गाजई॥
(५)
झूठा यह संसार झूठ सब कहत है।
सत्त सब्द की रहनि कोऊ नहिं गहत है॥
बिना सत्त नहिं गत्त कुगत्त परत है।
बुल्ला हृदय बिचारि सत्त से रहत है॥
(६)
मुरगी यह संसार चेहुँ चेहुँ करत है।
आतम राम को नाम हृदय नहिं धरत है॥
बिना राम नहिं मुक्ति झूठ सब कहत है।
बुल्ला हृदय बिचारि राम सँग रहत है॥
(७)
ऐसी बनिज हमारि राम को लेन को।
मन पवना दोउ दाम साहु को देन को॥
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