सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
बुल्ला साहिब का शब्दसार (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - जीवन-चरित्र एवं अमर पद)

बुल्ला साहिब का शब्दसार (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - जीवन-चरित्र एवं अमर पद)

Bulla Sahib Ka Shabdasara: Belvedere Press Allahabad

सन्त बुल्ला साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished36 पृष्ठ

पृष्ठ 25, कुल 36 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 25

रेखता २३
( ५ )
गाजत है छबि छाजत है,
उतै नाम निरंजन की गति हेरी ॥ १ ॥
राह लियो परमारथ की,
तब स्वारथ संजम सत्त की चेरी ॥ २ ॥
बानी बोल बिलास कि आनी,
मरन जिवन नहिं भव में फेरी ॥ ३ ॥
बुल्ला हिरदय बिचारि बोलै,
ऐसो ध्यान निरंतर राम से मेरी ॥ ४ ॥
( ६ )
बलि हौं बलि हौं सतगुरु की,
जिन ध्यान दियो परमेसुर को,
त्रिकुटी संगम निज राह निबेरी ॥ १ ॥
प्रेम बिलास अकास में बास है,
आवागवन रहित भौ फेरी ॥ २ ॥
अनहद बाजे झनकार कि बानी,
बिन सरवन तहँ सुनत है टेरी ॥ ३ ॥
बुल्ला हिरदय बिचारि बोलै,
ब्रह्मज्ञान कि बात सुनो मेरी ॥ ४ ॥
( ७ )
जो पै कोउ ध्यान में सदा रहै,
लहै ब्रह्मज्ञान तब साध जाय कहा है ॥१॥
मूल को साधि के पवन को बाँधि के,
त्रिकुटी में आइ के गगन द्वार जोहा है ॥२॥
जोती से जोती मिलो पवन में पानी मिलो,
धरती में अकास मिलो अनहद जाय गहा है ॥३॥