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बुल्ला साहिब का शब्दसार (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - जीवन-चरित्र एवं अमर पद)

बुल्ला साहिब का शब्दसार (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - जीवन-चरित्र एवं अमर पद)

Bulla Sahib Ka Shabdasara: Belvedere Press Allahabad

सन्त बुल्ला साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished36 पृष्ठ

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पृष्ठ 24

२२ बुल्ला साहिब का शब्दसार
( २ )
गगन के मँडल मगन मन में हुआ,
अध से उर्ध भरि परी बेरी ॥ १ ॥
सेत परकास आकास में फूलि रहि,
बसत है प्रान सुख चैन हेरी ॥ २ ॥
तहँ काया माया नहीं मरन जीवन नहीं,
एक साहिब की भई चेरी ॥ ३ ॥
दास बुल्ला कहै अगम गति तौ लहै,
धन्न सतगुरू महिमा तेरी ॥ ४ ॥
( ३ )
जिन को हरि नाम से नेह लगो,
तिनको अब गेह की काहे की आसा ॥ १ ॥
परतीत बनी निज साधुन से,
जिन गगन गुफा में दियो बासा ॥ २ ॥
जगमग जोति अपार बिराजत,
जम जालिम की कटी फाँसा ॥ ३ ॥
बुल्ला हिरदय बिचारि बोलै,
बँद छोड़ निरंजन देखु तमासा ॥ ४ ॥
( ४ )