बुल्ला साहिब का शब्दसार (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - जीवन-चरित्र एवं अमर पद)

बुल्ला साहिब का शब्दसार (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - जीवन-चरित्र एवं अमर पद)
Bulla Sahib Ka Shabdasara: Belvedere Press Allahabad
सन्त बुल्ला साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
DevanagariHindipublished36 पृष्ठ
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१८ बुल्ला साहिब का शब्दसार
॥ शब्द १० ॥
बुल्ला कवने द्वारा देखै आपु ॥टेक॥
कवने द्वारा आवै जाय । कवने द्वारा रहै समाय ॥ १ ॥
तिरबेनी द्वारे देखै आपु । सुखमन द्वारे सुमिरै जापु ॥ २ ॥
इँँगला पिंगला आवै जाय । दसव द्वारा रहै समाय ॥ ३ ॥
आरती
॥ शब्द १ ॥
ऐसी आरति मेरे मन भावै । रबि ससि पवन भवन मन लावै ॥१॥
ब्रह्मा बिसनु महेस लै आवै, एक मते ह्वै अरथ दिखावै ॥२॥
गंगा जमुना अरघ दिवावै, अस्तुति से जा प्रभुहिं मनावै ॥३॥
सुरति निरति लै घंट बजावै, जगमग जोति परम पद पावै ॥४॥
जन बुल्ला जो सरन बसि आवै, रंग महल बिच नाम जगावै ॥५॥
॥ शब्द २ ॥
पूजों निरकार बहु भाँती । जेकरे पुजत सितल१ मोरी छाती ॥१॥
जाके न चंद सूर दिन राती । नेम अरु धर्म न दीपक बाती ॥२॥
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