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बुल्ला साहिब का शब्दसार (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - जीवन-चरित्र एवं अमर पद)

बुल्ला साहिब का शब्दसार (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - जीवन-चरित्र एवं अमर पद)

Bulla Sahib Ka Shabdasara: Belvedere Press Allahabad

सन्त बुल्ला साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished36 पृष्ठ

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पृष्ठ 19

भेद १७
॥ शब्द ६ ॥
आली आजु कि रैन प्रीति मन भावै ॥ १ ॥
गाय बजावत हँसत हँसावत, सब रस लेय मनावै ॥ २ ॥
जन बुल्ला हरि चरन मनावै, निरखि सुरति गति आपु में पावै ॥ ३ ॥
॥ शब्द ७ ॥
नैना मोरे निपट बिकट ठौर अटके ॥ १ ॥
सुख को साथ सबै कोइ चाहै, दुखहिं परे पर छटके ॥ २ ॥
भौंह कमान नैन दोउ गाँसी, जहाँ लगै तहँ लटके ॥ ३ ॥
जन बुल्ला दाया सतगुरु की, देखु सकल जग भटके ॥ ४ ॥
॥ शब्द ८ ॥
पूरब देस कर आपुहिं बँभना, आपु भयल अबधूता ॥ टेक ॥
अपरम्पार पारब्रह्म बँभना, आयो हमरे घर अँगना ।
परम तत्त ले पूजि आपु हीं, सरल१ गावै अनहद ततना२ ॥ १ ॥
रजगुन तमगुन सतगुन सारल, हारल तन मन दोऊ ।
गगन मँडल में हरि रस चाखल, बूझै बिरला कोऊ ॥ २ ॥
ज्ञान कि तरकस सब्द तीर भरि, प्रेम धनुष धरि तानल ।
सुरति कै सीस निसाना मारल, भव का भंडा फोरल ॥ ३ ॥
निर्भय जन इक निर्गुन गावल, स्वासा सगुन भावल ।
जन बुल्ला बिन स्वासहि गावहि, सेत प्रकास समावल ॥ ४ ॥
॥ शब्द ६ ॥
चरन लागो इत तें हारो ॥ टेक ॥
ममता मान जान तन वारो । ब्रह्मा बिस्नु समाधी धारो ॥ १ ॥
तिरबेनी तिर घाट सँवारो । जगमग जगमग मनि उँजियारो ॥ २ ॥
भाग बड़ो जिन यह गति सारो । पवन पियाय नागिनी मारो ॥ ३ ॥
बिष उतरो तब भो उजियारो । बुल्ला रहै सदा हुसियारो ॥ ४ ॥
(१) साधारण ही । (२) तान ।
३