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बुल्ला साहिब का शब्दसार (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - जीवन-चरित्र एवं अमर पद)

बुल्ला साहिब का शब्दसार (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - जीवन-चरित्र एवं अमर पद)

Bulla Sahib Ka Shabdasara: Belvedere Press Allahabad

सन्त बुल्ला साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished36 पृष्ठ

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भेद १५
तीनिउ जना त्रिबेनी आना, गंग जमुन कीन्हो अस्नाना ॥३॥
परम तत्त पर लागो ध्याना, जन बुल्ला बोलहि ब्रह्मज्ञाना ॥४॥
॥ शब्द ६ ॥
अहो मन ज्ञानी, तूँ तौ परम प्रीति पहिचानी ॥ टेक ॥
उदय अस्त जा कि महिमा बोलै, सब घट अमृत बानी ॥१॥
सुरति डोरि लव लागि रहानी, राम नाम निजु जानी ॥२॥
रबि ससि पवन बिलोकै मनुवाँ, गगन मगन मन मानी ॥३॥
अगम अपार सिंधु सागर प्रभु, कह बुल्ला जिन जानी ॥४॥
॥ शब्द १० ॥
महबूब दिवाना पियत पियाला, निर्गुन खाना ॥ १ ॥
निर्गुन खाना त्रिकुटी जाना, साध संगति पहिचाना ॥ २ ॥
निरगुन खाना हरदम जाना, अष्ट जाम मस्ताना ॥ ३ ॥
निरगुन रूप बोलहि जन बुल्ला, पाया गगन रकाना¹ ॥ ४ ॥
॥ भेद ॥
॥ शब्द १ ॥
सतगुरु मुक्ति बतावल, पावल जिव कर मूल ।
सुमिरि सुमिरि सुख बिलसहि², सूच्छम गुन अस्थूल ॥ १ ॥
ऐसन अद्भुत है सो, जुग जुग अचल अपार ।
आवै जाय न उपजै बिनसै, सदा रहै इकतार ॥ २ ॥
मन माने की कहिये, तौ लहिये औतार ।
अपने अपने रंग में, रँगा सकल संसार ॥ ३ ॥
मनसा बाचा कर्मना, दूजा नहिं भाव ।
जन बुल्ला गुन गावही, आनँद मँगल बधाव ॥ ४ ॥
॥ शब्द २ ॥
बूझहु पंडित अचरज एक । सेत बरन तहँ सदा अलेख ॥१॥
साधि पवन षट चक्र छुड़ावो । तिरबेनी के घाटै आवो ॥२॥
(१) तोशा, सामान । (२) बिलास करता है ।