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बुल्ला साहिब का शब्दसार (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - जीवन-चरित्र एवं अमर पद)

बुल्ला साहिब का शब्दसार (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - जीवन-चरित्र एवं अमर पद)

Bulla Sahib Ka Shabdasara: Belvedere Press Allahabad

सन्त बुल्ला साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished36 पृष्ठ

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पृष्ठ 16

१४ बुल्ला साहिब का शब्दसार
सहजहिं चढ़ो अकास आस लै, लहरि उठत ब्रह्मज्ञान की ॥४॥
सुमिरत चरन कमल धरनी धर, उज्ज्वल बिमल बिकार की ॥५॥
जन बुल्ला यहि पदहिं समाने, फिरी दुहाई नाम की ॥६॥
॥ शब्द ४ ॥
उलटै पवन मवन१ ह्वै रहई । धरै ध्यान निर्गुन तत गहई ॥१॥
झलक झलक निर्गुन कै जोती । कोटिक भानु उदै छबि होती॥२॥
बाजत अनहद गगन अघोश । मगन भयो तहवाँ मन मोरा ॥३॥
जन बुल्ला कहैं इहै अधारा । राम राम कहि करहि पुकारा ॥४॥
॥ शब्द ५ ॥
ऐसी बिनय सुनहु अबिनासी । अब कि बार काटहु जम फाँसी॥१॥
भया प्रकास मिटा अँधियारा । आदि अंत मध भो उँजियारा ॥२॥
रूप रेख तहँ बरनि न जासी । निरंकार आपुहिं अबिनासी ॥३॥
जन बुल्ला तहँ रहै हजूरा । पूरन ब्रह्म देखा जहँ