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बुल्ला साहिब का शब्दसार (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - जीवन-चरित्र एवं अमर पद)

बुल्ला साहिब का शब्दसार (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - जीवन-चरित्र एवं अमर पद)

Bulla Sahib Ka Shabdasara: Belvedere Press Allahabad

सन्त बुल्ला साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished36 पृष्ठ

पृष्ठ 10, कुल 36 में से

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पृष्ठ 10

८ बुल्ला साहिब का शब्दसार
करहि सिद्धि आसा गँठियाये, ता पर करत गुमाना ॥ १ ॥
आतम राम न नीके जानै, चौरासी लपटाना ॥ २ ॥
दूध पियाय रिझाय राखि मन, भाखहि बेद पुराना ॥ ३ ॥
कहत फिरै हम सब से ऊपर, भूलो फिरत दिवाना ॥ ४ ॥
बीज एक अंकुर है एकै, फल फुल रहत समाना ॥ ५ ॥
उपजत बिनसत होत हैं केते, अंत केहू नहिं आना ॥ ६ ॥
नाम प्रताप की महिमा सुनिये, तीन लोक धरि ध्याना ॥ ७ ॥
जन बुल्ला रामहिं को सेवक, बोलहिं सब्द निधाना ॥ ८ ॥
॥ शब्द ५ ॥
दया बिनु छार सकल माया, कबहौं राम नाम नहिं आया ॥टेक॥
पोखरा खनावहिं¹ बाग लगावहिं, पावहिं मन माया ॥ १ ॥
आतम राम न नीके जानहिं, ज्यों आया त्यों जाया² ॥ २ ॥
समुझि न परहि साध को मारग, जिन हरि नामहिं गाया ॥ ३ ॥
जन बुल्ला रामहिं को सेवक, मिथ्या जानहि माया ॥ ४ ॥
॥ शब्द ६ ॥
जीवन जनम सुधारन देह ।
देह छोड़ि बिदेह होना, अचल पद यहि लेह ॥ १ ॥
काको माता पिता काको, काको सुत बित देह ।
जीवतही का नात इनका, मुए काको केह ॥ २ ॥
देह धरि के राम कृस्नहुँ, जगत आनि बड़ेह ।
पारब्रह्म को सुमिरन करिकै, जोतिहिं जोति मिलेह ॥ ३ ॥
जानि कै अनजान होइये, पूजिये ब्रह्म नेह ।
दास बुल्ला बानि बोले, काल के मुख खेह³ ॥ ४ ॥
प्रेम
॥ शब्द १ ॥
साची भक्ति गुपाल की, मेरो मन माना ।
मनसा बाचा कर्मना, सुनु संत सुजाना ॥ १ ॥
(१) तालाब खोदाते हैं । (२) चला गया । (३) धूल ।