बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)
Brihat Samhita Vol 2 with Vimala Hindi Commentary
आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा
पृष्ठ 593, कुल 760 में से
संदर्भ में पढ़ेंराशिविभागाध्यायः ५६५
मघा सकला। पूर्वा च फल्गुनी सकला। उत्तरायाश्च पादः। इति सिंहः। तत्परिशेष-
मिति। तदित्युत्तरायाः परामर्शः। तत्परिशेषमुत्तरापादत्रयम्। हस्तः सकलः। चित्राया अर्धं
प्रथमं पादद्वयम्। इति कन्याराशिः।।३।।
अथ तुलावृश्चिकयोर्नक्षत्रविभागमाह—
तौलिनी चित्रान्त्यर्धं स्वातिः पादत्रयं विशाखायाः।
अलिनी विशाखापादस्तथानुराधान्विता ज्येष्ठा।।४।।
चित्रा का शेष दो पाद, स्वाति का चार पाद और विशाखा का आद्य तीन पाद तुला
राशि का तथा विशाखा का शेष एक पाद, अनुराधा का चार पाद और ज्येष्ठा का चार
पाद वृश्चिक राशि का होता है।।४।।
चित्राया अन्त्यमर्धं पश्चिमं पादद्वयम्। स्वातिः सकला। विशाखायाः पादत्रयम्। एतत्तौ-
लिनि तुले स्थितम्। विशाखायाः पश्चिमः पादः। अनुराधा सकला। तथा तयान्विता संयुक्ता
ज्येष्ठा सकलैव। एतदलिनि वृश्चिके।।४।।
अथ धन्विमकरयोर्नक्षत्रविभागमाह—
मूलमषाढा पूर्वा प्रथमश्चाप्युत्तरांशको धन्वी।
मकरस्तत्परिशेषं श्रवणः पूर्वं धनिष्ठार्धम् ।।५।।
मूल का चार पाद, पूर्वाषाढ़ा का चार पाद और उत्तराषाढ़ा का प्रथम एक पाद धनु
राशि का तथा उत्तराषाढ़ा का शेष तीन पाद, श्रवण का चार पाद और धनिष्ठा का प्रथम
दो पाद मकर राशि का होता है।।५।।
मूलं सकलम्। आषाढा पूर्वा सकलैव। उत्तरांशकः प्रथम आद्यपादः। एष धन्वी।
मकरस्तत्परिशेषमिति। तदित्युत्तरायाः परामर्शः। तत्परिशेषमुत्तरापादत्रयमन्त्यम्। श्रवणः
सकलः। पूर्वं धनिष्ठार्धम्। धनिष्ठाया आद्यं पादद्वयम्। एष मकरः।।५।।
अथ कुम्भमीनयोर्नक्षत्रविभागमाह—
कुम्भोऽन्त्यधनिष्ठार्धं शतभिषगंशत्रयं च पूर्व्याः।
भद्रपदायाः शेषं तथोत्तरा रेवती च झषः।।६।।
धनिष्ठा का शेष दो पाद, शतभिषा का चार पाद और पूर्वाभाद्रपदा का प्रथम तीन
पाद कुम्भ राशि का तथा पूर्वाभाद्रपदा का शेष एक पाद, उत्तरभाद्रपदा का चार पाद
और रेवती का चार पाद मीन राशि का होता है।।६।।
धनिष्ठायामन्त्यमर्धं पश्चिमं पादद्वयम्। शतभिषक् सकला। पूर्व्या अंशत्रयमाद्यं
पादत्रयम्। एष कुम्भः। भद्रपदायाः शेषमिति। भद्रपदायाः पूर्वभद्रपदायाः शेषमेकमंशम्।
तथोत्तरा सकला। रेवती च सकलैव। एष झषो मीन इति।।६।।
CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA