बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)
Brihat Samhita Vol 2 with Vimala Hindi Commentary
आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा
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५५४ बृहत्संहिता
द्विपदभवनं प्राप्तो योंऽशः शुभाऽन्यगृहोदये।
द्विपदभवनेष्वप्यन्यांशा भवन्त्यशुभावहाः।।
तथा च—
विलग्नांशः स्वनाथेन यद्युद्वाहे न दृश्यते।
पुंविनाशस्ततोऽस्तांशो यद्येवं योषितस्ततः।।
लग्नांशकादस्तांशकस्यापि स्वामिदृष्टिर्विधेयेति।।७-८।।
इति श्रीभट्टोत्पलविरचितायां संहिताविवृतौ करणगुणो
नाम शततमोऽध्यायः ।।१००।।
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