बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)
Brihat Samhita Vol 2 with Vimala Hindi Commentary
आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा
DevanagariHindipublished760 पृष्ठ
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अषाढे द्वे पूर्वोत्-`
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अ - षा - ढे (aṣāḍhe)
द्वे (dve)
पू - र्वो - त्- (pūrvot-)
:
राषाढे मासचतुष्के चतुर्भिर्मासैस्तयोः पाकः। अभिजित्तारा सद्यः पाको तस्मिन्नेवाहनि
Wait, let's look at "पाको":
प (pa) + ा (ā) + क (ka) + ो (o) = पाको.
Yes, "पाको तस्मिन्नेवाहनि"!
:
पाकं करोति।।१५।।
:
अथ श्रवणादीनां पाककालज्ञानमाह—
:
सप्ताष्टावध्यर्द्धं त्रयस्त्रयः पञ्च चैव मासाः स्युः ।
Wait, let's check:
सप्ताष्टावध्यर्द्धं:
स - प्ता - ष्टा - व - ध्य - र्द्धं (saptāṣṭāvadhyarddhaṁ)
त्र - य - स्त्र - यः (trayastrayaḥ)
प - ञ्च (pañca)
चै - व (caiva)
मा - साः (māsāḥ)