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सर्वकोश
बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

Brihat Samhita Vol 2 with Vimala Hindi Commentary

आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा

DevanagariHindipublished760 पृष्ठ

पृष्ठ 543, कुल 760 में से

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पृष्ठ 543

शाकुनोत्तराध्यायः ५१५
नवमनवांशकाधिपतिर्जीवस्तदीयवर्गात् प्रथममक्षरं तकारमापतति। वृश्चिकस्य नवमनवांशका-
धिपतिर्जीवस्तदीयवर्गाद् द्वितीयमक्षरं थकारमापतति। कुम्भस्य नवमनवांशकाधिपतिर्बुध-
स्तदीयवर्गाद् द्वितीयमक्षरं ठकारमापतति। अत एवोक्तम्—
अन्त्ये वृषे टं तमुशन्ति सिंहे थं सप्तगे ठं प्रवदन्ति कुम्भे।। इति।।२४।।
अथ द्विस्वभावेष्वाह—
द्विमूर्तिसंज्ञे मिथुने जकारः षष्ठे बकारः प्रथमांशके स्यात् ।
धनुर्धरेऽस्तोपगते गकारो मीनद्वये चाम्बरगे सकारः ॥२५॥
द्विस्वभाव राशि मिथुन लग्न में प्रथम नवांश हो तो मिथुन में प्रथम नवांशाधिपति
शुक्र के वर्ग का तृतीय अक्षर जकार, चतुर्थ राशि ( कन्या ) में प्रथम नवांशाधिपति
शनि के वर्ग का तृतीय अक्षर बकार, सप्तम राशि ( धनु ) में प्रथम नवांशाधिपति
मंगल के वर्ग का तृतीय अक्षर गकार और दशम राशि ( मीन ) में प्रथम नवांशाधिपति
चन्द्र के वर्ग का सप्तम अक्षर सकार आता है।।२५।।
द्विमूर्तिसंज्ञा मिथुनकन्याधन्वन्मीनाः। तुलमकरमेषकर्कटेभ्य उदयं यान्ति। मिथुनस्य
प्रथमनवांशकस्तुलस्तस्य स्वामी शुक्रस्तदीयाच्चवर्गात् तृतीयमक्षरं जकारमापतति।
कन्यायाः प्रथमनवांशको मकरस्तस्य स्वामी सौरस्तदीयात् पवर्गात् तृतीयमक्षरं बकार-
मापपतति। धनुषः प्रथमनवांशको मेषस्तस्य स्वामी भौमस्तदीयवर्गात् तृतीयमक्षरं गकार-
मापपतति। मीनस्य प्रथमनवांशकः कर्कटस्तस्य स्वामी चन्द्रस्तदीयवर्गात् सप्तममक्षरं
सकारमापतति। अत एवोक्तम्—
द्विमूर्तिसंज्ञे मिथुने जकारः षष्ठे बकारः प्रथमांशके स्यात्।
धनुर्धरेऽस्तोपगते गकारो मीनद्वये चाम्बरगे सकारः।। इति।।२५।।
अन्येष्वप्याह—
लग्ने घकारो हिबुके भकारश्चास्ते झकारोऽम्बरमध्यगे ई ।
लग्ने दकारो हिबुके धकारमस्ते डकारं विदुरम्बरे ढम् ।।२६।।
मिथुन लग्न में द्वितीय नवांश हो तो मिथुन में द्वितीय नवांशाधिपति मंगल के वर्ग
का चतुर्थ अक्षर घकार, चतुर्थ राशि ( कन्या ) में द्वितीय नवांशाधिपति शनि के वर्ग का
चतुर्थ अक्षर भकार, सप्तम राशि ( धनु ) में द्वितीय नवांशाधिपति शुक्र के वर्ग का
चतुर्थ अक्षर झकार और दशम राशि ( मीन ) में द्वितीय नवांशाधिपति सूर्य के वर्ग का
चतुर्थ अक्षर ईकार आता है। मिथुन लग्न में तृतीय नवांश हो तो मिथुन में तृतीय
नवांशाधिपति बृहस्पति के वर्ग का तृतीय अक्षर दकार, चतुर्थ राशि ( कन्या ) में तृतीय
नवांशाधिपति बृहस्पति के वर्ग का चतुर्थ अक्षर धकार, सप्तम राशि ( धनु ) में तृतीय
नवांशाधिपति बुध के वर्ग का तृतीय अक्षर डकार और दशम राशि ( मीन ) में तृतीय
नवांशाधिपति बुध के वर्ग का चतुर्थ अक्षर ढकार आता है।।२६।।
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