बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)
Brihat Samhita Vol 2 with Vimala Hindi Commentary
आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५१४ बृहत्संहिता
अक्षर नकार आता है। वृष लग्न में सप्तम नवांश हो तो वृष में सप्तम नवांशाधिपति
चन्द्र के वर्ग का षष्ठ अक्षर षकार, चतुर्थ राशि ( सिंह ) में सप्तम नवांशाधिपति शुक्र
के वर्ग का प्रथम अक्षर चकार, सप्तम राशि ( वृश्चिक ) में सप्तम नवांशाधिपति शनि
के वर्ग का प्रथम अक्षर पकार और दशम राशि ( कुम्भ ) में सप्तम नवांशाधिपति
मंगल के वर्ग का प्रथम अक्षर ककार आता है।।२३।।
वृषस्य षष्ठनवांशकाधिपतिर्बुधस्तदीयवर्गाच्चतुर्थमक्षरं ढकारमापतति। सिंहस्य षष्ठ-
नवांशाधिपतिर्बुधस्तदीयवर्गात् पञ्चममक्षरं णकारमापतति। वृश्चिकस्य षष्ठनवांशकाधिपति-
र्जीवस्तदीयवर्गाच्चतुर्थमक्षरं धकारमापतति। कुम्भस्य षष्ठनवांशाधिपतिर्जीवस्तदीयवर्गात्
पञ्चममक्षरं नकारमापतति। अत एवोक्तम्—
लग्ने ढकारोऽथ जले णकारश्चास्ते धकारोऽम्बरगे नकारः।
वृषस्य सप्तमनवांशकाधिपतिश्चन्द्रस्तदीयवर्गात् षष्ठमक्षरं षकारमापतति। सिंहस्य
सप्तमनवांशकाधिपतिः शुक्रस्तदीयवर्गात् प्रथममक्षरं चकारमापतति। वृश्चिकस्य सप्तम-
नवांशकाधिपतिः सौरस्तदीयवर्गात् प्रथममक्षरं पकारमापतति। कुम्भस्य सप्तमनवांशका-
धिपतिर्भौमस्तदीयवर्गात् प्रथममक्षरं ककारमापतति। अत एवोक्तम्—
वृषे षकारो हिबुके चकारः कीटे पकारो नृघटे ककारः।। इति।।२३।।
अन्येष्वप्याह—
ऊकारमाहुर्वृषभे जले खमस्ते फकारो नृघटे छकारः।
अन्त्ये वृषे टं तमुशन्ति सिंहे थं सप्तगे ठं प्रवदन्ति कुम्भे ।।२४।।
वृष लग्न में अष्टम नवांश हो तो वृष में अष्टम नवांशाधिपति सूर्य के वर्ग का षष्ठ
अक्षर ऊकार, चतुर्थ राशि ( सिंह ) में अष्टम नवांशाधिपति मंगल के वर्ग का द्वितीय
अक्षर खकार, सप्तम राशि ( वृश्चिक ) में अष्टम नवांशाधिपति शनि के वर्ग का द्वितीय
अक्षर फकार और दशम राशि ( कुम्भ ) में अष्टम नवांशाधिपति शुक्र के वर्ग का द्वितीय
अक्षर छकार आता है। वृष लग्न में नवम नवांश हो तो वृष में नवम नवांशाधिपति बुध
के वर्ग का प्रथम अक्षर टकार, सप्तम राशि ( वृश्चिक ) में नवम नवांशाधिपति बृहस्पति
के वर्ग का द्वितीय अक्षर थकार और दशम राशि ( कुम्भ ) में नवम नवांशाधिपति बुध
के वर्ग का द्वितीय अक्षर ठकार आता है।।२४।।
वृषस्याष्टमनवांशकाधिपतिः सूर्यस्तदीयवर्गात् षष्ठमक्षरमूकारमापतति। सिंहस्याष्ट-
मनवांशकाधिपतिर्भौमस्तदीयवर्गाद् द्वितीयमक्षरं खकारमापतति। वृश्चिकस्याष्टमनवांशका-
धिपतिः शनिस्तदीयवर्गाद् द्वितीयमक्षरं फकारमापतति। कुम्भस्याष्टमनवांशकाधिपतिः
शुक्रस्तदीयवर्गाद् द्वितीयमक्षरं छकारमापतति। अत एवोक्तम्—
ऊकारमाहुर्वृषभे जले खमस्ते फकारो नृघटे छकारः।
वृषस्य नवमनवांशकाधिपतिर्बुधस्तदीयवर्गात् प्रथममक्षरं टकारमापतति। सिंहस्य
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