बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)
Brihat Samhita Vol 2 with Vimala Hindi Commentary
आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा
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अन्येष्वप्याह—
आकारमाद्येऽम्बुगते घकारमस्ते भकारं मकरे झकारम् ।
लग्ने डकारं हिबुके दकारमस्ते धकारं मकरे ढकारम् ।।१७।।
मेष लग्न में पञ्चम नवांश हो तो मेष में पञ्चम नवांशाधिपति सूर्य के वर्ग का
द्वितीय अक्षर आकार, चतुर्थ राशि ( कर्क ) में पञ्चम नवांशाधिपति मंगल के वर्ग का
चतुर्थ अक्षर घकार, सप्तम राशि ( तुला ) में पञ्चम नवांशाधिपति शनि के वर्ग का
चतुर्थ अक्षर मकार और दशम राशि ( मकर ) में पञ्चम नवांशाधिपति शुक्र के वर्ग का
चतुर्थ अक्षर झकार आता है। मेष लग्न में षष्ठ नवांश हो तो मेष में षष्ठ नवांशाधिपति
बुध के वर्ग का तृतीय अक्षर डकार, चतुर्थ राशि ( कर्क ) में षष्ठ नवांशाधिपति बृहस्पति
के वर्ग का तृतीय अक्षर दकार, सप्तम राशि ( तुला ) में षष्ठ नवांशाधिपति के वर्ग का
चतुर्थ अक्षर धकार और दशम राशि ( मकर ) में षष्ठ नवांशाधिपति बुध के वर्ग का
चतुर्थ अक्षर ढकार आता है।।१७।।
मेषे पञ्चमनवांशकस्याधिपतिः सूर्यस्तदीयवर्गाद् द्वितीयमक्षरमाकारमापतति। कर्कटे
पञ्चमनवांशकाधिपतिर्भौमस्तदीयवर्गाच्चतुर्थमक्षरं घकारमापतति। तुल पञ्चमनवांशकस्य
सौरोऽधिपतिस्तद्वर्गाच्चतुर्थमक्षरं भकारमापतति। मकरे पञ्चमनवांशकस्य शुक्रोऽधिपति-
स्तदीयवर्गाच्चतुर्थमक्षरं झकारमापतति। अत एवोक्तम्—
अकारमाद्येऽम्बुगते घकारमस्ते भकारं मकरे झकारम्।
मेषे षष्ठनवांशकस्य बुधोऽधिपतिस्तदीयवर्गात् तृतीयवर्गात् तृतीयमक्षरं डकारमापतति।
कर्कटके षष्ठनवांशाधिपतिर्जीवस्तदीयवर्गात् तृतीयमक्षरं दकारमापतति। तुले षष्ठनवांशा-
धिपतिर्जीव एव तदीयवर्गाच्चतुर्थमक्षरं ढकारमापतति। अत एवोक्तम्—
लग्ने डकारं हिबुके दकारमस्ते धकारं मकरे ढकारम्।। इति।।१७।।
अन्येष्वप्याह—
लग्ने जकारो हिबुको मकारस्तुले ङकारो मकरे लकारः ।
लग्ने ककारो हिबुके पकारस्तुले चकारो मकरे इकारः ।।१८।।
मेष लग्न में सप्तम नवांश हो तो मेष में सप्तम नवांशाधिपति शुक्र के वर्ग का
पञ्चम अक्षर जकार, चतुर्थ राशि ( कर्क ) में सप्तम नवांशाधिपति शनि के वर्ग का
पञ्चम अक्षर मकार, सप्तम राशि ( तुला ) में सप्तम नवांशाधिपति मंगल के वर्ग का
पञ्चम अक्षर ङकार और दशम राशि ( मकर ) में सप्तम नवांशाधिपति चन्द्र के वर्ग
का तृतीय अक्षर लकार आता है। मेष लग्न में अष्टम नवांश हो तो मेष में अष्टम
नवांशाधिपति मंगल के वर्ग का प्रथम अक्षर ककार, चतुर्थ राशि ( कर्क ) में अष्टम
नवांशाधिपति शनि के वर्ग का प्रथम अक्षर पकार, सप्तम राशि ( तुला ) में अष्टम
नवांशाधिपति शुक्र के वर्ग का प्रथम अक्षर चकार और दशम राशि ( मकर ) में अष्टम
नवांशाधिपति सूर्य के वर्ग का तृतीय अक्षर इकार आता है।।१८।।
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