बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)
Brihat Samhita Vol 2 with Vimala Hindi Commentary
आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंशाकुनेऽन्तरचक्राध्यायः ४१५
वायव्य कोण से तृतीय भाग में स्थित शकुन कोलाहल करे तो मित्र से समागम
और धन की प्राप्ति होती है। वायव्य कोण से चतुर्थ भाग में स्थित शकुन कोलाहल करे
तो वस्त्र और घोड़े की प्राप्ति तथा प्रिय मित्रजन का समागम होता है।।१३।।
वायव्यकोणात् परे तृतीयभागे मित्रेण सह सुहृदा सह समागमो भवति। धनस्यार्थस्य
च प्राप्तिः। अतोऽस्मात् तृतीयात् परं वस्त्रस्याम्बरस्याश्वस्य तुरगस्य च प्राप्तिः। इष्टेन
वल्लभेन सुहृदा मित्रेण सह सम्प्रयोगः समागमः ।।१३।।
अन्यदप्याह—
दधितण्डुललाजानां लब्धिरुदग् दर्शनं च विप्रस्य ।
अर्थावाप्तिरनन्तरमुपगच्छति सार्थवाहश्च ।।१४।।
उत्तर दिशा में स्थित शकुन कोलाहल करे तो दही, चावल और खीलों ( लावा )
की प्राप्ति तथा ब्राह्मणों का दर्शन होता है। उत्तर दिशा से द्वितीय भाग में स्थित शकुन
कोलाहल करे तो धन की प्राप्ति और बनिये के साथ समागम होता है।।१४।।
उदगुत्तरस्यां दिशि दधितण्डुललाजानां लब्धिः। दध्नस्तण्डुलानां लाजानां च लाभो
भवति। विप्रस्य ब्राह्मणस्य दर्शनमवलोकनम्। अनन्तरमतः परमन्यस्मिन् भागेऽर्थवाप्ति-
र्थलाभो भवति सार्थवाहश्चोपगच्छति आयाति।।१४।।
अन्यदप्याह—
वेश्यावटुदाससमागमः परे शुक्लपुष्पफललब्धिः ।
अत ऊर्ध्वं चित्रकरस्य दर्शनं चित्रवस्त्राप्तिः ।।१५।।
उत्तर दिशा से तृतीय भाग में स्थित शकुन कोलाहल करे तो वेश्या, ब्राह्मण और
भृत्य का समागम तथा सफेद फूलों का लाभ होता है। उत्तर दिशा से चतुर्थ भाग में
स्थित शकुन कोलाहल करे तो चित्रकार का दर्शन और चित्र वस्त्रों का लाभ होता
है।।१५।।
परेऽन्यस्मिन् भागे वेश्या बन्धकी। वटुर्ब्राह्मणः। दासो भृत्यः। एतैः समागमः संयोगः।
शुक्लपुष्पाणां फलानां च लब्धिर्लाभो भवति। अत ऊर्ध्वमतः परमन्यस्मिन् भागे चित्रक-
रस्य दर्शनं भवति। चित्राणां नानावर्णानां वस्त्राणामम्बराणां च प्राप्तिर्भवति।।१५।।
अन्यदप्याह—
ऐशान्यां देवलकोपसङ्गमो धान्यरत्नपशुलब्धिः ।
प्राक् प्रथमे वस्त्राप्तिः समागमश्चापि बन्धक्या ।।१६।।
ईशान कोण में स्थित शकुन कोलाहल करे तो देवलक ( पुजारी आदि ) के साथ
समागम तथा धान्य, रत्न और पशुओं का लाभ होता है। पूर्व के प्रथम भाग ( ईशान
कोण से द्वितीय भाग ) में स्थित शकुन कोलाहल करे तो वस्त्र की प्राप्ति और वेश्या के
साथ समागम होता है।।१६।।
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