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सर्वकोश
बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

Brihat Samhita Vol 2 with Vimala Hindi Commentary

आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा

DevanagariHindipublished760 पृष्ठ

पृष्ठ 393, कुल 760 में से

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पृष्ठ 393

मुक्तालक्षणाध्यायः ३६५
अधुना मुक्तारचितानामाभरणानां संज्ञा आह—
सुरभूषणं लतानां सहस्रमष्टोत्तरं चतुर्हस्तम्।
इन्दुच्छन्दो नाम्ना विजयच्छन्दस्तदर्धेन ॥३१॥
शतमष्टयुतं हारो देवच्छन्दो ह्यशीतिरेकयुता ।
अष्टाष्टकोऽर्धहारो रश्मिकलापश्च नवषट्कः ॥३२॥
द्वात्रिंशता तु गुच्छो विंशत्या कीर्तितोऽर्धगुच्छाख्यः ।
षोडशभिर्माणवको द्वादशभिश्चार्धमाणवकः ॥३३॥
मन्दरसंज्ञोऽष्टाभिः पञ्चलता हारफलकमित्युक्तम्।
सप्ताविंशतिमुक्ता हस्तो नक्षत्रमालेति ॥३४॥
अन्तरमणिसंयुक्ता मणिसोपानं सुवर्णगुलिकैर्वा।
तरलकमणिमध्यं तद्विज्ञेयं चाटुकारमिति ॥३५॥
एकावली नाम यथेष्टसङ्ख्या हस्तप्रमाणा मणिविप्रयुक्ता ।
संयोजिता या मणिना तु मध्ये यष्टीति सा भूषणविद्भिरुक्ता ॥३६॥
इति श्रीवराहमिहिरकृतौ बृहत्संहितायां मुक्तालक्षणं
नामैकाशीतितमोऽध्यायः ॥८१॥
एक हजार आठ लड़ी वाली मोतियों के माला की लम्बाई चार हाथ हो तो वह
माला 'इन्दुच्छन्द' संज्ञक होती है। यह देवताओं के भूषण के लिये होती है। पाँच सौ
चार लड़ी वाली माला की लम्बाई दो हाथ हो तो 'विजयच्छन्द', एक सौ आठ लड़ी
वाली अथवा इक्यासी लड़ी वाली माला की लम्बाई हो तो 'देवच्छन्द' संज्ञा है। चौंसठ
लड़ी वाली माला की संज्ञा 'अर्धहार', चौवन लड़ी वाली माला की संज्ञा 'रश्मिकलाप',
बत्तीस लड़ी वाली माला की संज्ञा 'गुच्छ', बीस लड़ी वाली माला की संज्ञा 'अर्धगुच्छ',
सोलह लड़ी वाली माला की संज्ञा 'माणवक', बारह लड़ी वाली माला की संज्ञा
'अर्धमाणवक', आठ लड़ी वाली माला की 'मन्दर' और पाँच लड़ी वाली माला की संज्ञा
'फलक' है। साथ ही एक हाथ लम्बी सत्ताईस मोतियों की माला का नाम 'नक्षत्रमाला'
है। पूर्वोक्त एक हाथ लम्बी माला के मध्य में मणि या सुवर्ण की गुलिका पिरोई जाय
या उस माला में मणिसोपान तथा हेमनिबद्ध मणि पिरोई जाय तो उसको 'चाटुकार'
कहते हैं। यथेष्ट मोतियों से युक्त हाथ भर लम्बी मध्यमणि से रहित माला को 'एकावलि'
और मध्यमणि से युक्त माला को भूषण के लक्षणों को जानने वालों ने 'यष्टी' नाम से
कहा है॥३१-३६॥
इति 'विमला'हिन्दीटीकायां मुक्तालक्षणाध्याय एकाशीतितमः ॥८१॥
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